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अफसरों की मनमानी से ग्रामीणों के घर में घुसा नहर का पानी

Sun, 18 Jan 2015 12:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
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अफसरों की मनमानी से कड़ाके की सर्दी में लोगों के घरों में पानी घुस गया है। अफसरों ने कागजों में नहरों की सफाई दिखा दी और एक करोड़ 27 लाख 35 हजार की धनराशि हजम कर गए। जबकि हकीकत यह है कि नहरों की सफाई हुई ही नहीं, जिसका नतीजा रहा कि पानी छोड़ते ही माइनर ओवरफ्लो हो गए।
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सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई है तो लोगों के घरों में पानी घुस गया है। कड़ाके की सर्दी में लोगों के घरों में घुसा पानी उनकी मुसीबत बढ़ा दिया है। अनाज के लेकर पशु चारे तक भीग गए हैं। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है।

जिले में दो प्रमुख नहरें हैं, जिसमें निचली गंगा नहर से 20 रजबहे व 130 माइनरों से किसानों को फसल सिंचाई का पानी दिया जाता है। रामगंगा नहर में 15 रजबहे और 62 माइनरों से किसान फसलों की सिंचाई कर रहे हैं।
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इसके लिए नवंबर में निचली रामगंगा नहर के लिए 32 लाख 80 हजार रुपये विभागीय मद से व 43 लाख रुपये मनरेगा से नहर व माइनरों की सिल्ट सफाई के लिए धनराशि दी गई थी।

रामगंगा नहर में 25 लाख रुपये विभागीय मद व 26 लाख 55 हजार रुपये मनरेगा से मिली थी। सभी रजबहों व माइनरों की सिल्ट सफाई का कार्य एक जनवरी तक कराया गया है।

अफसरों की ओर से कराए गए इस सफाई कार्य की पोल नहर में पानी आते ही खुल गई। नहर की तलहटी में सिल्ट होने की वजह से पानी खेतों में भर गया और लोगों के घरों में घुस गया। निचली गंगा व रामगंगा के अधिशाषी अभियंता ओपी चौधरी ने मीटिंग का बहाना बनाकर फोन काट दिया।

माइनरों की सफाई में ठेकेदारों ने लेबर से सिल्ट निकालने के बजाय, ट्रैक्टरों से जोताई करा दी है। इससे चंपतपुर माइनर, गंभरी रजबहा, पारादान माइनर, बरुआ माइनर में पानी का ओवरफ्लो है।

असोथर क्षेत्र के बेरुई माइनर में दो दिन से खांदी कटी हुई है, जिसमें दर्जनों किसानों की फसलें पानी में डूब गई हैं। खांदी का पानी तेजी से बह रहा है, जिससे खेत भरने के बाद ग्रामीणों के घर तक पानी आ गया।

ग्रामीणों ने मसक्कत के बाद खांदी बांधकर पानी को रोका। घरवासीपुर के किसान अवधेश, सुंदरलाल और रामगोपाल ने बताया कि फसल में पानी भरने से गेहूं और आलू की फसल पूरी तरह से डूब गई है। इससे परिवार के साथ-साथ जानवरों के लिए भूसा के लिए भी समस्या पैदा हो गई है।
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