दतौली के फूल चंद्र की नौ साल की बेटी खुशी कई दिन से बीमार थी। गुरुवार को उसे उल्टी दस्त शुरू हो गई। जिस पर परिवार के लोग उसे बहुआ के एक निजी चिकित्सक की क्लीनिक ले गए। चिकित्सक ने दवाएं देकर घर ले जाने को कहा।
खुशी को परिजन वापस ले आए। आधी रात अचानक फिर तबियत खराब हो गई। वह कुछ कर पाते उससे पहले खुशी की जान निकल गई। ग्रामीण राम कुमार, अवधेश, माया, संतोषी का कहना है कि पखवारे भर से गांव में बीमारी फैली है। फिर भी स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं आई है। पीएचसी में डॉक्टर नहीं मिलते हैं। ऐसे में प्राइवेट इलाज कराना मजबूरी बना है।