नवरात्र में मां के सातवें स्वरूप मां काली के दर्शन भक्तों ने किए। आदि शक्ति मां जगदंबा की आराधना कर भक्तों ने शेरावाली के जयकारे लगाए और मां से मनोवांछित फल की कामना की। भक्तों ने छोटी छोटी कन्याओं को भोज कराया।
काल को जीतने वाली काल रात्रि हैं। भक्तों ने मां को नीले फूल की मालाओं से अलंकृत किया और ओम काली देव्यै नम: मंत्रों के साथ देवी को काले अंगूर से भोग लगाया।
शहर के अहमदगंज स्थित कालिका मंदिर में भक्तों की जबरदस्त भीड़ रही। महिलाओं ने देवी गीतों से मां को प्रसन्न किया। वहीं दुर्गा मंदिर, भुइयां देवी और शीतला मंदिर में दिनभर पूजा अर्चना का दौर चला।
आचार्य पंडित केके पांडेय और आचार्य पंडित कृष्ण दत्त अवस्थी ने बताया कि शुक्रवार को भगवती महामायी गौरी का दिन है। जो नवरात्र में ब्रत नहीं रह पाए वह ब्रत रहकर मां का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
महागौरी सौभाग्य को देने वाली हैं। इनकी पूजा विवाहित महिलाएं करती हैं तो विशेष फल प्राप्त होता है। महिलाएं सोलह सृंगार का सामान अर्पण करती हैं तो जगत जननी मां जगदंबे पति की आयु बढ़ाती हैं। भगवान शिव ने महाकाली पर गंगाजल छिड़कर कर उन्हें महागौरी बनाया।