प्रदर्शनी में झूले से गिरने से दो चचेरी बहनों की मौत हो गई। घटना के बाद प्रदर्शनी संचालक मौके से फरार हो गया। लोगों का कहना है कि झूले पर बैठने वालों को सुरक्षा बेल्ट नहीं लगाई गई थी।
शहर में बिंदकी बस स्टाप के पास ड्रीमलैंड नाम से प्रदर्शनी चल रही है। इसमें बुधवार रात को करीब 50 फीट ऊंचे आसमानी झूले पर तमाम लोग सवार थे। झूले के एक सेट पर सैयदवाड़ा इमलियाबाग मोहल्ला निवासी निशा (17) पुत्री हसन अली एवं उसकी चचेरी बहन नेहा (15) पुत्री पप्पू सवार थीं। झूले के ऊंचाई पर पहुंचते ही निशा नीचे गिर पड़ी। इस दौरान उसे बचाने के चक्कर में चचेरी बहन नेहा भी नीचे आ गिरी। दोनों किशोरियों के नीचे गिरते ही प्रदर्शनी में अफरा-तफरी मच गई। दोनों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। जहां चिकित्सक ने निशा को मृत घोषित कर दिया। नेहा को गंभीरावस्था में कानपुर ले जाया जा रहा था कि रास्ते में औंग के पास उसने भी दम तोड़ दिया। इस दौरान प्रदशनी संचालक राकेश शुक्ला मौके से फरार हो गया। मृत किशोरियों के घर पर तमाम लोगों की भीड़ जुट गई। आक्रोश को देखते हुए सीओ सिटी वंदना सिंह मौके पर पहुंची और संचालक के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया। सीओ सिटी का कहना है कि तहरीर नहीं मिली है। फिर भी सुरक्षा मानकों के बारे में जानकारी की जा रही है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर चल रही थी प्रदर्शनी
शहर के बिंदकी बस स्टाप के पास एक पखवारे से संचालित हो रहे प्रदर्शनी मेले में मानकों को ताक पर रख दिया गया है। हजारों की तादाद में उमड़ने वाली भीड़ की जान माल की सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी नहीं है। प्रशासन ने भी अपनी आंखे बंद कर रखी थी, जिसका नतीजा रहा कि दो किशोरियों की जान चली गई।
प्रदर्शनी में अलग-अलग तरह के मेले लगे हुए हैं। इन मेलों को संचालन के लिए प्रशासन से इजाजत ली जाती है। प्रशासन की ओर से नियुक्ति नोडल अधिकारी बाकायदे सुरक्षा मानकों की जांच करते हैं, इसके बाद प्रदर्शनी में झूला लगाने की इजाजत दी जाती है। लेकिन बिंदकी बस स्टैंड के पास लगी प्रदर्शनी में झूले को लेकर मानकी की अनदेखी की गई। इसी वजह से सैयदवाड़ा इमलियाबाग मोहल्ले की चचेरी बहनों निशा और नेहा की मौत हो गई। हादसे के बाद प्रदर्शनी स्थल में ताला लटक गया है। प्रदर्शनी में मौजूद लोगों की मानें तो मानकों की पूरी तरह से अनदेखी की गई। इतनी ऊंचाई वाले झूले के बॉक्स में बेल्ट नहीं थी। झूले के बॉक्स में रॉड भी नहीं थी।
फायर बिग्रेड की व्यवस्था नहीं
अब बात सुरक्षा की जाएगी तो यहां अगर आग लग जाए तो फायर बिग्रेड मुहैया नहीं है। इसके अलावा आग बुझाने के एक भी यंत्र नहीं है। किसी तरह अनहोनी होने या फिर भगदड़ मचने पर दूसरा कोई आकस्मिक निकासी द्वार तक नहीं बनाया गया है। एक ही गेट से लोगों ने जाने और आने के लिए बनाया गया है। झूलों के आसपास कोई जाल जैसे इंतजाम नहीं है कि अगर कोई हादसा हो तो जाल में गिरने से लोगों की जान बच सके। सबकुछ दरकिनार करके संचालक को प्रदर्शनी चलाने की अनुमति मिली है।
पिछले कई सालों से ईद के मौके पर प्रदर्शनी मेले का शहर में आगाज होता है। इस बार भी प्रदर्शनी ईद के मौके पर ही चालू की गई थी। प्रतिदन हजारों की भीड़ प्रदर्शनी का आनंद लेने पहुंचती हैं। करीब पांच बीघा जमीन में खाने, पीने की दुकानें, आधा दर्जन से अधिक झूले, क्रॉकरी और लड़कियाें के डांस तक का इंतजाम है।
दोनों चचेरी बहनें थीं छात्राएं
आसमानी झूले से गिरकर हुई मौत के गाल में समाईं दोनों चचेरी बहनें छात्राएं थीं। हसन अहमद की पुत्री निशा कक्षा 11 की छात्रा थी। जबकि चचेरे भाई अनीस अहमद उर्फ पप्पू की बेटी नेहा कक्षा 10 की छात्रा थी।
मृतका के घर लगी लोगों की भीड़
दो किशोरियों की मौत की खबर मिलते ही उनके घर पर तमाम लोगों की भीड़ जुट गई। इस दौरान जब लोगों को पता चला कि झूले में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई तो कुछ लोग आक्रोशित हो गई। बढ़ती भीड़ को देखते हुए सीओ सिटी वंदना सिंह मौके पर पहुंचीं। पुलिस भीड़ को समझा बुझाकर शांत कराया।
प्रदशनी में सन्नाटा
किशोरियों के झूले से गिरते ही वहां चीख पुकार मच गई। आनन-फानन में किशोरियों को अस्पताल पहुंचाया गया तो प्रदर्शनी में मौजूद लोग खिसक लिए। करीब आधे घंटे के अंदर समूची प्रदर्शनी सन्नाटे में तब्दील हो गई। पुलिस ने प्रदर्शनी गेट पर तालेबंदी कर दी है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
हादसे के बाद हुई दोनों चचेरी बहनों की मौत के बाद परिजनों की ओर से मिलने वाली तहरीर के बाद कार्रवाई होगी। झूलों व प्रदर्शनी लगाने में मानकों का ध्यान रखा गया या नहीं, इस मामले की जांच कराई जाएगी।’
- विवेक श्रीवास्तव, एसडीएम सदर