फतेहपुर। जिला अस्पताल के रक्तकोष से अब गैर जरूरी अवयव की खपत में विराम लगेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि रक्त अवयव इकाई पर काम शुरू हो चुका है।
इस इकाई के बनने के बाद जिसे जो जरूरी होगा, उसे वही अवयव उपलब्ध कराया जाएगा। इससे एक तो अवयव की अनावश्यक खपत पर रोक लगेगी। इसके साथ ही रक्त की जरूरत वाले शरीर भी साइड इफेक्ट से बचा रहेगा।
राजकीय रक्तकोष से अभी हूल ब्लड उपलब्ध कराया जाता रहा है जबकि प्रत्येक यूनिट ब्लड में प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी व क्रायोप्रिएसीपिएट नाम के अवयव होते हैं।
मसलन, अगर कोई कैंसर पीड़ित है तो उसे पैक्डसेल उपलब्ध कराया जाना चाहिए। चूंकि अभी तक यहां पर रक्त के चारों अवयव अलग अलग करने की सुविधा नहीं है।
ऐसे में जरूरतमंद कैंसर पीड़ित को भी हूल ब्लड उपलब्ध कराना मजबूरी थी। अब इस पर विराम लगने जा रहा है। रक्तकोष के बगल में 55 वर्ग मीटर पर यह इकाई स्थापित की जा रही है।
भवन की नींव खोदी जा चुकी है। आठ पिलर के लिए गड्ढे भी खोद लिए गए है। रक्तकोष प्रभारी डॉ.वरद वर्धन बिसेन का कहना है कि रक्त अवयव इकाई पर काम शुरू है। ब्लड बैंक फ्रीजर, डीप फ्रीजर समेत करीब आठ से 10 मशीनों की दरकार होगी।
वसूली में लगेगी रोक
रक्त अवयव इकाई के काम करने से खून के नाम पर खेल करने वाले नर्सिंग होम का धंधा मंदा होगा। अभी यह प्लाज्मा व प्लेटलेटे्स के नाम पर तीमारदारों से मनचाहा दाम वसूलते चले आ रहे हैं।
अगर तीमारदार कानपुर या फिर प्रयागराज से इन अवयव की पूर्ति करता है तो उसे इसके लिए भागदौड़ करनी पड़ती है। इस पर भी जरूरी नहीं कि समय से इसकी उपलब्धता हो जाए।
ऐसे में हालात अभी तक मरता क्या न करते जैसे हैं। इसी का फायदा उठाया जा रहा है। उम्मीद की जा सकती है कि रक्त अवयव इकाई से इस पर विराम लगेगा।