निर्माणाधीन फतेहपुर-बबेरू-मर्का घाट पर यमुना नदी का पुल। संवाद
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फतेहपुर। असोथर क्षेत्र के लोगों को पड़ोसी बांदा व चित्रकूट जिले का सफर आसान करने के लिए यमुना पर अभी तक पुल नहीं बन सका है। बसपा शासनकाल में इसकी आधारशिला रखी गई थी। पुल का 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। अब धीमी गति से निर्माण चल रहा है। अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
बसपा शासनकाल में यमुना पर पुल बनाने के लिए वर्ष 2011 में असोथर क्षेत्र के रामनगर कौहान-मरका के नाम से आधारशिला रखी गई थी। 2014 में पुल बनाकर चालू करने का लक्ष्य था। धनाभाव और अधिकारियों की हीलाहवाली से ऐसा नहीं हो सका। बढ़ती महंगाई के कारण तीन बार इस्टीमेट रिवाइज किया गया। पहले 54.89 करोड़ की लागत से पुल का निर्माण होना था। इसके बाद 65 करोड़ और अब 89 करोड़ का रिवाइज इस्टीमेट है। पहले इस काम को चित्रकूट इकाई करवा रही थी। अब बांदा डिवीजन खुलने के बाद सेतु निगम बांदा इकाई को दो साल में निर्माण पूर्ण कराने की जिम्मेदारी दी है। कई साल से बंद निर्माण कार्य जनवरी 2022 से शुरू हुआ था, लेकिन काम सुस्त गति से चल रहा है।
पुल के अलावा असोथर से रामनगर कौहान व मरका से बबेरू रोड तक पहुंच मार्ग का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। पीडब्लूडी द्वारा रोड बनाने के सर्वे में जिन किसानों की जमीन अधिग्रहीत की जानी है, उनमें अभी तक 12 किसानों ने बैनामा तक नहीं किया है। इसी कारण से सड़क बनाने का काम ठप है।
रामनगर कौहन-मरका पुल 912.18 मीटर निर्माण कराया जाना है। यमुना में दो पिलर (कोठी) बीच धारा में बचे हुए हैं। बाकि सभी पिलर बनकर तैयार हो गए हैं। कुछ पिलरों को ऊंचाई देनी हैं। इसके बाद बीम डालने का काम होना है। पुल की चौड़ाई सात मीटर कराई जानी है।
पुल बनाने का काम शुरू करा दिया गया है। शासन से पर्याप्त बजट नहीं मिला है। इस कारण से निर्माण कार्य में तेजी नहीं आ रही है। पर्याप्त बजट मिलने पर तय समय में पुल बनाकर तैयार करा दिया जाएगा।
- दशरथ लाल, सहायक अभियंता, सेतु निगम बांदा