आखिर वही हुआ, जिसका डर था। बुधवार को सड़क हादसे में घायल चार लोगों को ट्रामा सेंटर लाया गया था। इनमें से एक की हालत काफी नाजुक थी। इसके बावजूद गंभीर रूप से घायल शख्स को करीब घंटे भर तड़पने को छोड़ दिया गया। हालत और बिगड़ी तो उसे आक्सीजन दी गई, लेकिन शायद सिलेंडर खाली था। आनन-फानन दूसरा सिलेंडर मंगाया गया, लेकिन जान नहीं बचाई जा सकी। इसे लापरवाही की इंतहा ही कही जाएगी कि बीएचटी मेें घायल की पल्स व बीपी तक का जिक्र नहीं था। हां खुद का पल्ला झाड़ने के लिए आर्थो सर्जन व ईएमओ के बीच तकरार जरूर हुई।
अमर उजाला ने बुधवार को ‘गंभीर रोगियों को लाना खतरे खाली नहीं’ शीर्षक से ट्रामा सेंटर की बदहाली को प्रकाशित किया था। जिसमें दो अप्रैल से चालू हुए थ्री लेबल के ट्रामा सेंटर में विशेषज्ञ स्टाफ और जान बचाने के काम में आने वाली मशीनें उपलब्ध न होने का जिक्र किया गया। इसकी हकीकत तब सामने आ गई जब गाजीपुर व लक्ष्मणपुर गांव के बीच दोपहर डेढ़ बजे सड़क हादसा हो गया। इस हादसे में चार लोग घायल हुए। जिन्हें 108 नंबर एंबुलेंस से ट्रामा सेंटर लाया गया।
इस दौरान यहां पर ड्यूटी पर तैनात आर्थो सर्जन सुधीर श्रीवास्तव का पता नहीं था। ईएमओ डॉ. हर गोविंद और फार्मासिस्ट एपी प्रजापति जरूर मौजूद थे। मौजूद स्टाफ ने लापरवाही की हद पार करते हुए गंभीर रूप से घायल युवक को पहले हाथ लगाने की जहमत नहीं ली। फिर काफी देर बाद उसे बिना टांका लगाए पट्टी बांध दी। इस दौरान उसकी हालत और बिगड़ गई। तब आक्सीजन लगाया गया। चूंकि सिलेंडर शायद खाली था, इसलिए बाद में दूसरा आक्सीजन मंगाया गया।
मगर उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। घायल की पल्स और बीपी की स्थिति तक जानने की कोशिश नहीं की गई। बीएचटी में इन दोनों का जिक्र नहीं था। इसे लेकर ईएमओ से आर्थो सर्जन की नोकझोक भी हुई। जिसके बाद सीएमएस डॉ. एके मिश्रा को मौके पर आना पड़ा। चूंकि मरने वाले युवक की पहचान नहीं हो सकी थी, इसलिए हो हल्ला नहीं हुआ। इस मामले में सीएमएस ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। यदि लापरवाही की बात सामने आती है तो कार्रवाई करेंगे।