फतेहपुर। बांदा-टांडा हाईवे के बाईपास पर तीन साल से टूटे पड़े रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य 15 जून से शुरू किया जाएगा। रेलवे ने एनएचएआई को ओवर ब्रिज बनाने की अनुमति दे दी है।
ओवर ब्रिज का डिजाइन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बंगलूरू (आईआईएससी) ने बनाया है। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि स्पेन की सेंट जोंस कंपनी ही दोबारा ओवरब्रिज का निर्माण कराएगी।
एनएचएआई ने वर्ष 2012-13 में करीब 1200 करोड़ से बांदा-टांडा मार्ग का प्रोजेक्ट तैयार किया था। निर्माण की जिम्मेदारी स्पेन की कंपनी सेंट जोंस को दी गई थी। कंपनी ने 11 किमी लंबे बाइपास का निर्माण किया, इसमें करीब 424 करोड़ रुपये की लागत आई थी।
यह बाईपास बांदा मार्ग को कानपुर-प्रयागराज से जोड़ता है। बाइपास को दिल्ली-हावड़ा रूट से होकर गुजरना था, इसलिए ओवरब्रिज का निर्माण कराकर जनवरी 2019 में वाहनों का आवागमन शुरू कराया गया।
निर्माण के छह माह बाद ही जून 2019 में ही ओवरब्रिज से बीम अलग हो गई। स्थिति गंभीर देख तत्काल ही ब्रिज से वाहनों का आवागमन भी बंद करा दिया गया। इसके बाद जनवरी 2021 से ब्रिज तोड़ने का काम शुरू हुआ, लेकिन वह भी चार माह बाद ही रोक दिया गया। तब से एनएचएआई को रेलवे से अनुमति मिलने का इंतजार था।
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फतेहपुर। करीब 424 करोड़ से बने बांदा-टांडा बाईपास के निर्माण में एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) और स्पेन की सेंट जोंस कंपनी की लापरवाही उजागर हुई थी। कंपनी ने जो काम किया था, उसे एनएचएआई के अधिकारियों ने आंख मूंदकर पास भी कर दिया था। यही कारण है कि दोबारा निर्माण में जितना भी खर्च आएगा, वह इन्हीं दोनों को वहन करना होगा।
जनवरी 2019 में बाईपास पर वाहन दौड़ना शुरू हुए थे। इसके कुछ महीने बाद ही बाइपास की सड़क भी जगह-जगह धंस गई थी। कई जगह गड्ढे भी हो गए थे, जिस पर पैचवर्क कराकर खामियों को छिपाने का प्रयास किया गया था। इसके बाद भी वाहन सवारों को बाइपास से गुजरने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। माना जा रहा है कि बाईपास निर्माण में भी मानकों की अनदेखी हुई है।
बाईपास में दिल्ली-हावड़ा रूट पर टूटे पड़े ब्रिज का निर्माण कराने की तैयारी पूरी हो चुकी है। लंबे समय बाद रेलवे से निर्माण कराने की मंजूरी मिल गई है। कार्यदायी संस्था 15 जून से ब्रिज निर्माण शुरू कराएगी। निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- एसबी सिंह, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई रायबरेली