खखरेरू थानाक्षेत्र के पुरमई गांव में रविवार रात जयमाल के समय हर्ष फायरिंग में दुल्हन के चचेरे भाई की जान चली गई। मां ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। दोनों पक्षों में तय हुआ कि दुल्हन बाद में विदा की जाएगी। जिसके बाद बाराती लौट गए।
पुरमई के कुलवंत उर्फ मुन्ना मिश्रा की बेटी मोनी का विवाह कौशांबी जिले के कोखराज थाना के अंदावा गांव निवासी निर्भय नारायन पांडेय के बेटे विनय से तय हुआ था। रविवार को बारात आई थी। रात करीब 12 बजे खाना, पीना चल रहा था और जयमाल की रस्म शुरू थी। मोनी का चचेरा भाई अंकित (12) पुत्र मनोज मिश्रा स्टेज के पास खड़ा था। मनोज दूसरे प्रांत में नौकरी करते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जयमाल में अचानक एक पक्ष ने हर्ष फायरिंग कर दी। एक गोली अंकित के दाहिने आंख के ऊपर सिर पर जा लगी।
जिससे वह गिरा और तड़पकर दम तोड़ दिया। खुशियों का माहौल चीख-पुकार में तब्दील हो गया। हर्ष फायरिंग में बच्चे की मौत के बाद जो भी आयोजन में मौजूद था भाग निकला। केवल परिवार और गिने-चुने लोग बचे। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। मृतक की मां ऊषा देवी बेटे का शव देख बदहवास हो गईं। एसओ गणेश प्रसाद का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। वीडियोग्राफी, मोबाइल क्लीपिंग की मदद से तफ्तीश की जा रही है।
नहीं विदा हुई मोनी
खखरेरू। दुल्हन के चचेरे भाई की हर्ष फायरिंग से हुई मौत के बाद दोनों परिवार में शोक का माहौल रहा। बाद में तय हुआ कि दुल्हन की विदाई बाद में कराई जाएगी। इसके बाद बराती वापस चले गए।
...तो तमंचे से हुई फायरिंग
जिले में चुनावी आचार संहिता लागू है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से हर्ष फायरिंग प्रतिबंधित है। इसके बावजूद हर्ष फायरिंग हुई और बच्चे की जान चली गई। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो एक प्रधान का भांजा समारोह में शामिल था। वह जयमाल के पास हाथ में असलहा लहराते हुए डांस कर रहा था। इसके बाद उसने फायरिंग शुरू की। उसे कई लोगों ने रोका, लेकिन नहीं माना। गोली लोड करते वक्त चली और बच्चे के माथे से सिर को पार कर गई। इस बारे में जब खखरेरू एसओ से पूछा गया तो उनका कहना है कि चुनाव के चलते सभी लाइसेंसी असलहे जमा हैं। गोली लाइसेंसी असलहे से नहीं चली। आशंका है कोई तमंचा लेकर आया और वारदात हो गई। तफ्तीश में उसका नाम खुल जाएगा।
सहायक शासकीय अधिवक्ता जय पाल वर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने हर्ष फायरिंग पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। हर्ष फायरिंग होने पर आरोपी के खिलाफ 304 ए के तहत पुलिस रिपोर्ट दर्ज करती है। इसके बाद ट्रायल में इंटेशन मानते हुए 304 का मुकदमा भी दर्ज हो सकता है। इसमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा हो सकती है। यदि असलहा बिना लाइसेंस का है तो दफा 25 आर्म्स एक्ट की धारा बढ़ जाती है, इसमें तीन साल की सजा हो सकती है। यदि फायरिंग करने वाला नाबालिग है, तो किशोर न्याय बोर्ड से सजा होती है।