धर्म संस्कार महोत्सव एवं मेला के छठवें दिन बुढ़वा गांव में बटुक उपनयन संस्कार कार्यक्रम हुए। गायत्री मंत्र की गूंज के बीच बटुक भिक्षा का कार्यक्रम संपन्न हुआ। गायत्री मंत्र पर रोशनी डालते हुए इसे विश्व कल्याण का जरिया बताया गया। उधर यज्ञशाला की परिक्रमा के लिए सुबह से शाम तक लोग जुटते रहे।
आठ दिवसीय कार्यक्रम में हर रोज भीड़ बढ़ रही है। हालांकि सामाजिक दूरी का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। शुक्रवार को बटुक उपनयन वेदआरंभ समावर्तन संस्कार का आयोजन हुआ। जिसमें 21 बटुक उपनयन संस्कार के लिए आगे आए। वैदिक विधि विधान से गायत्री मंत्र की दीक्षा के साथ यगोपवित धारण कराया गया।
आचार्य विमल शास्त्री ने गायत्री मंत्र की महिमा बताते हुए कहा कि गायत्री ब्राह्मणों के लिए कामधेनु है। जिससे सभी प्रकार की भौतिक प्राप्ति के साथ अलौकिक शक्तियां प्रदान होती हैं। गायत्री जप अनुष्ठान से ही विश्व का कल्याण संभव है। सभी बटुक से गायत्री मंत्र का एक माला जप करने का संकल्प कराया गया।
संस्कार कार्यक्रम के साथ ही यज्ञ वेदी की परिक्रमा को आस्था का आलम देखते बना। यज्ञशाला से उठती हवन और धूप की सुगंध वातावरण को भक्तिमय बना की नजर आई। इस मौके पर अमर किशोर रानू मास्टर मनु मोहित सत्यम राहुल विनय द्विवेदी जयकमार वैभव शिवम अरविंद अमन चुन्नीलाल सूरज आर्यन हिमांशु हिमांग प्रियांशु छोटे यादव मौजूद है।