नगर बिंदकी में बने बस स्टाप के अंदर बांदा डिपो की चल रही दो दर्जन से अधिक बसों के न जाने से सवारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गांधी चौराहे में ही चालक बसों को खड़ी कर सवारियां भरते है, जिससे यहां दुर्घटनाएं भी होती रहती है। बांदा एआरएमओ के आदेश के बावजूद इन बसों के चालक व परिचालक अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे है। इससे यात्रियों में आक्रोश व्याप्त है। यात्रियों के कहने पर चालक परिचालक लड़ाई झगड़े पर अमादा होकर उनसे अभद्रता भी करते हैं।
नगर बिंदकी जनपद का प्रमुख व्यवसायिक केंद्र है, यहां यात्रियों की सुविधा के लिए बस स्टैंड भी बना हुआ है। जहां हैंडपंप, शौचालय छाया के लिए टीन शेड, कैंटीन आदि सुविधाएं सरकार ने मुहैय्या करा रखी हैं। यहां से बांदा, कानपुर , हमीरपुर, घाटमपुर आदि स्थानों से व्यापारियों का आना जाना बना रहता है। बिंदकी से सवारियां भी काफी संख्या में निकलती है। बांदा डिपो ने बांदा से कानपुर वाया बिंदकी मार्ग में तीस बसें चला रखी हैं। यह बसें पहले गांधी चौराहे के नजदीक महरहारोड में स्थित बस स्टैंड के अंदर जाकर खड़ी होती थी। जहां सवारियों को उतारने व वहीं से सवारियों को भरने का काम किया जाता था। विगत छह माह से बांदा डिपो के चालक व परिचालक बसों को स्टैंड के अंदर नहीं ले जाते हैं, जिससे खासकर यात्रियों को पानी, लघुशंका आदि की सुविधाओं से वंचित रहने के साथ ही अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बस स्टाप के अंदर सवारियां बसों का इंतजार घंटों करती रहती हैं और बसें गांधी चौराहे से बाहर ही बाहर निकल जाती है।
इंसेट
क्या कहते है जिम्मेदार
बिंदकी। बांदा के एआरएम महेंद्र कुमार ने बताया कि सभी चालकों को बस स्टाप के अंदर बसों को ले जाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद यदि यह बसों को अंदर नहीं ले जाते तो जांचकर इनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।