फर्रुखाबाद। जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बद से बदतर होती जा रही हैं। अब तो मरीजों को बांंटने के बजाय जीवन रक्षक दवाएं भी फेंकी जा रही हैं। रविवार को नवाबगंज में एंटीबायोटिक सरकारी दवाएं बड़ी मात्रा में पड़ी मिलीं।
स्वास्थ्य विभाग में मनमाने तरीके से ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल के चलते कर्मचारी मनमाने तरीके से ड्यूटी भी कर रहे हैं। कहीं प्रसूताओं से वसूली के मामले सामने आते हैं तो कहीं दो बजे पीएचसी पर ताले पड़ जाते हैं। हेल्थ वेलनेस सेंटरों की हालत ही दयनीय है।
इससे मरीजों तक लक्ष्य के मुताबिक दवाएं पहुंच ही नहीं पातीं। नगर पंचायत नवाबगंज के मोहम्मदाबाद रोड स्थित जाकिर हुसैन ट्रस्ट के पास बड़ी मात्रा में एंटीबायोटिक कैप्सूल डॉक्सीसाईक्लीन फेंके गए। बैच नंबर 1090 कैप्सूल के डिब्बे पर उत्पादन तिथि अक्तूबर 2023 व एक्सपायरी डेट सितंबर 2025 पड़ी है। एक डिब्बे में 100 कैप्सूल हैं।
बताया जा रहा है कि बाजार में एक कैप्सूल की कीमत करीब 10 रुपये है। इस हिसाब से लाखों रुपये की जीवन रक्षक दवाएं मरीजों को देने के बजाय फेंककर बर्बाद की जा रही हैं। नवाबगंज क्षेत्र में सीएचसी के अलावा दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व 17 हेल्थ वेलनेस सेंटर हैं। अब सवाल उठता है कि इतनी बड़ी मात्रा में यह दवाएं किस अस्पताल की फेंकी गई है। फिलहाल जानकारी मिलने पर दवा उठवाकर सीएचसी में रखवा दी गई है।
इनकी भी सुनें
नवाबगंज सीएचसी प्रभारी डॉ.लोकेश शर्मा ने बताया कि उन्हें 20 हजार कैप्सूल का स्टाक मिला था। इसमें तीन हजार कैप्सूल मरीजों को वितरित हो चुके हैं, जबकि 17 हजार कैप्सूल स्टॉक में रखे हैं। जानकारी पर उन्होंने सड़क किनारे पड़ी दवाई मंगवा ली है। इसकी गिनती कराने पर 18000 कैप्सूल निकले। यह कैप्सूल प्रसूताओं के अलावा बुखार, फोड़ा आदि सहित कई बीमारियों में मरीजों को दिए जाते हैं।
सीएमओ बोले, कराएंगे जांच, होगी कार्रवाई
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि वह बाहर हैं। सोमवार को कार्यालय पहुंचकर सभी अस्पतालों में दवाई के स्टॉक की जांच कराएंगे। दवाई किस अस्पताल की है, इसकी गहनता से जांच कराकर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।