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और अब ददुआ का मंदिर

Thu, 04 Feb 2016 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर।
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पुलिस मुठभेड़ में आठ साल पहले मारे जा चुके कुख्यात डकैत शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ का मंदिर बनाए जाने की तैयारी यहां बेहद गोपनीय ढंग से चल रही है। धाता ब्लाक के नरसिंहपुर कबरहा गांव में दस्यु सरगना के बनवाए इस मंदिर में गुरुवार से 10 दिन का आयोजन शुरू होगा।
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इसी बीच किसी दिन अचानक मंदिर परिसर में ददुआ की मूर्ति के अलावा उसकी मां कृष्णा देवी, पिता रामप्यारे सिंह उर्फ लंबरदार व पत्नी सियादेवी उर्फ बड़ी बुइया की मूर्तियां भी स्थापित करने की तैयारी है। इस पूरे आयोजन पर प्रशासन की पैनी नजर है। जिलाधिकारी राजीव रौतेला का कहना है कि विधि संगत कार्यक्रमों की ही अनुमति दी जाएगी।

चित्रकूट जिले के देवकली गांव के राम प्यारे का बड़ा बेटा शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ वर्ष 1975 में अपराध की दुनिया में आया। इसके बाद 32 साल तक अपहरण, हत्या, फिरौती जैसे संगीन अपराधों में उसका नाम जुड़ता गया। वह चित्रकूट में 21 जुलाई 2007 को एसटीएफ से मुठभेड़ में मारा गया। ददुआ के खिलाफ कई जिलों में हत्या, डकैती, अपहरण व फिरौती के 224 मामले दर्ज थे। उस समय उस पर पांच लाख का इनाम था।
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ददुआ का बेटा वीर कुमार कर्वी से विधायक है। बेटी चिरौंजी देवी धाता की ब्लाक प्रमुख रह चुकी हैं। भाई बाल कुमार पटेल मिर्जापुर के सांसद रह चुके हैं और मौजूदा समय में सपा की राजनीति कर रहे हैं। बाल कुमार का बेटा राम सिंह प्रतापगढ़ की पट्टी विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में ददुआ के भाई बाल कुमार ने बताया कि मूर्तियां जयपुर में बन रही हैं। इनको धार्मिक महोत्सव के दौरान स्थापित कराया जाना है। यदि समय से बन कर आ जाती हैं तो इनका अनावरण हो जाएगा। इस आयोजन में फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट, पट्टी प्रतापगढ़, मिर्जापुर, रायबरेली आदि जिलों के हजारों लोगों को आमंत्रित किया गया है।

यहीं बची थी ददुआ की जान
धाता (फतेहपुर)। ददुआ के बनवाए शिवहरे रामजानकी हनुमान मंदिर की नींव 14 फरवरी 2000 को रखी गई थी। ददुआ की ससुराल धाता थाना क्षेत्र के घटईपुर में थी। वह यहां 1994 में आया, तभी पुलिस ने उसे घेर लिया। वह पुलिस को चकमा देकर ससुराल से एक किमी. दूर स्थित कबरहा में बने छोटे से हनुमान मंदिर में आकर छिप गया था। उसने यहीं संकल्प लिया था कि अगर पुलिस से बच गया तो यहां भव्य मंदिर बनवाएगा। पुलिस से बचने पर उसने मंदिर का निर्माण शुरू कराया। मंदिर वर्ष 2006 में बनकर तैयार हो गया। इसमें करोड़ों की लागत आई थी। इसके बाद से ही इसे भव्यता देने का काम जारी रहा। आज यह तीन मंजिला मंदिर बन चुका है।
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