बैसाखी पर्व पर सिख धर्म की 316वीं वर्षगांठ मनाई गई। गुरुद्वारे में शबद-कीर्तन हुए इसके बाद लंगर में लोगों ने प्रसाद छका। बैसाखी के दिन ही सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी।
सिख धर्म के दसवें गुरु गोबिंद सिंह से पहले की हुकूमत हिंदू धर्म के धार्मिक चिह्नों (जनेऊ, तिलक, चोटी आदि) को काटकर अपमानित कर रही थी। धार्मिक और सामाजिक अत्याचारों से लड़ने व हिंदुओं का खोया हुआ सम्मान वापस दिलाने के लिए सिख पंथ की स्थापना हुई।
शासकों के अत्याचार से डरे भारत के लोगों में जान फूंकने के लिए गुरु जी ने 1699 में बैसाखी के दिन पंजाब आनंदपुर साहिब में पांच प्यारो के शीश मांगकर खालसा पंथ की स्थापना की। गुरु गोबिंद सिंह ने लोगों को जुल्म के खिलाफ लड़ने, मजलूमों तथा कमजोरों की रक्षा करने की सीख दी।
बैसाखी पर्व पर मंगलवार को सिख धर्म की 316वीं वर्षगांठ मनाई गई। ‘देह शिव बर मोहे ईहै शुभ करमन ते कबहुं न टरों...’ के साथ गुरु गोबिंद सिंह को याद किया। इस मौके पर गुरुद्वारे में शबद-कीर्तन के बाद हुए लंगर ने लोगों ने प्रसाद भी छका।
स मौके पर अध्यक्ष संतोष सिंह, पपिंदर, राजिंदर सिंह, दर्शन सिंह बग्गा, कुलवंत सिंह, चारण सिंह, जितेंदर पाल सिंह, विद्या भूषण तिवारी, जगजीत कौर, हरजीत कौर, हरविंदर कौर, ज्योति, सिमरन, जसवीर कौर आदि रहे।