खजुहा/फतेहपुर। डेढ़ माह तक पानी के लिए हाय तौबा करते आए खजुहा की सप्ताह भर पहले जगी उम्मीदों पर फिर पानी फिर गया । पहले मोटर फुंकने का दंश झेला और अब ट्रांसफार्मर का ठीहा बदले बगैर आपूर्ति देने से विद्युत विभाग के हाथ खड़े करने से समस्या जस की तस है। जल निगम है कि वह भी इस खर्च को वहन करने से बच रहा है। ऐसी स्थित में पेयजल समस्या का जल्द समाधान होना संभव नहीं।
ग्राम समूह पेयजल योजना से बनी पानी की टंकी से प्यास बुझा रही दस हजार से ज्यादा की आबादी को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। डेढ़ महीने पहले नलकूप संख्या दो की मोटर फुंकने से एक नलकूप के सहारे जलापूर्ति की जा रही थी। अभी सप्ताह भर पहले विद्युत विभाग ने फुं की मोटर तो दुरुस्त करा दी, लेकिन वह नलकूप को बिजली देने को राजी नहीं है। नतीजा जिस आबादी तक पानी पहुंच रहा है वह महज पंद्रह से बीस मिनट के लिए। ऐसे में हैंडपंप ही सहारा बने है। अमर उजाला/ काम्पैक्ट ने यहां की पेयजल समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था उसके बाद फुंकी मोटर तो बन कर आ गई लेकिन उसका लाभ अभी तक मिलना शुरू नहीं हो सका है।
निवासी मुन्नी देवी बोली अक्सर कई कई दिन पानी नहीं मिलता है। गीता गुप्ता कहती है पानी न मिलने से अन्य काम छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मधु बाजपेई कहती है हैंडपंप ही एक मात्र सहारा है। जिनमें से आधे खारा पानी देते हैं। प्यास तो नहीं बुझती लेकिन दूसरा चारा भी क्या है। बीना बहन ने बताया कि हैंडपंप का पानी पीना पड़ रहा है जिसका पानी पिया नहीं जाता है। अंकिता त्रिवेदी कहती है पाइप लाइन का पानी डेढ़ माह से पीने को नहंी मिला है। उनको दूर से पानी ढोकर लाना होता है। सूत्र बताते है विद्युत विभाग व जल निगम की लड़ाई में प्यास नहीं बुझ पा रही है। दो हजार का खर्च उठाने से दोनों विभाग पीछे हट रहे है। विद्युत विभाग का तर्क है कि ऊपर से ट्रांसफार्मर उतार कर नीचे रखवाया जाए क्योंकि स्पार्किंग से मोटर फुंकती है। वहीं, जल निगम का कहना है कि वह यह काम क्यों करे। उसका काम पानी पिलाना है वह यह कर रहा है।