फतेहपुर। वैक्सीन की कमी पशुपालकों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। इसके कारण खुरपका और मुंहपका की बीमारियों से मवेशियों को बचाने के लिए टीकाकरण नहीं शुरू हो पा रही है। शासन से जिले के लिए
केवल दो लाख वैक्सीन मांगी गई थी जबकि 30 हजार वैक्सीन ही अब तक मिल पाई है। जबकि जिले में करीब साढ़े छह लाख दुधारू पशु हैं।
मवेशियों को गलाघोटू की बीमारी से निजात दिलाने के लिए टीके लगाए जाने हैं। इसमें वैक्सीन की अनुपलब्धता परेशानी का सबब साबित हो रही है। गोवंश, महिष और भेड़-बकरियों को मिलाकर जिले में करीब पौने सात लाख मवेशी हैं। इनको टीकाकरण के लिए पहले चरण में दो लाख वैक्सीन की डिमांड विभाग ने भेजी थी। इसके सापेक्ष30 हजार वैक्सीन एक दिन पहले विभाग को शासन से मिली है। ऐसे में विभाग यह तय नहीं कर पा रहा है कि किस क्षेत्र से वैक्सीनेशन शुरू कराया जाए और किस क्षेत्र में बाद में वैक्सीनेशन कराया जाए। पशुओं को टीकाकरण की डिमांड हर जगह से है। दरअसल इस समय दुधारू गाय की कीमत 30 हजार से 50 हजार तक जबकि दुधारू भैंस की कीमत 35 हजार रुपए से 70 हजार रुपए प्रति जानवर है। इतने कीमती पशुओं की बीमारी से मौत पशुपालकों को तगड़ा झटका देती है। पहले जहां टीकाकरण में पशुपालक उदासीनता बरतते थे वहीं अब कीमती पशुओं को टीकाकरण के लिए कई क्षेत्रों में पशुपालक खुद आगे आ रहे हैं। नियमत: जून के अंत तक गलाघोटू के टीके लग जाने चाहिए। टीका का मूल्य दो रूपए निर्धारित किया गया है जिससे पशुपालक इसका खर्च आसानी से उटा सकें। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाक्टर अभयकांत कुलश्रेष्ठ ने बताया दो लाख टीकों की डिमांड पहली किस्त में भेजी गई थी जिसमें सिर्फ तीस हजार टीके ही उपलब्ध हुए है जो बेहद ह कम है। उन्होंने बताया वैक्सीनेशन मिलते ही जल्द टीकाकरण शुरू कराया जाएगा।