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साल में लाखों खर्च, स्कूलों में नहीं है टाट पट्टी की व्यवस्था

Sun, 21 Sep 2014 05:31 AM IST
Fatehpur
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फतेहपुर। अनिवार्य शिक्षा अधिनियम का सच: परिषदीय स्कूलों में हर साल लाखों रुपए टाट पट्टी की खरीददारी के नाम से खर्च होने के बावजूद बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों की कौन कहे, शहरी विद्यालय भी टाट पट्टी के लिए तरस रहे हैं। जबकि हर साल प्रत्येक प्राथमिक स्कूल में 5 तथा उच्च प्राथमिक स्कूल में 7 हजार का बजट आवंटित किया जाता है।
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जिले में 1902 प्राथमिक, 746 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। इन सभी में हर सत्र की शुरुआत में टाट पट्टी आदि की खरीद के लिए प्राथमिक में पांच और उच्च प्राथमिक स्कूल में सात हजार का बजट विकास अभिदान फंड के नाम से अवंटित किया जाता है। लेकिन इस धनराशि से शायद ही किसी स्कूल में टाट पट्टी की खरीद की जाती होगी।
सीन-1
शहर के सादीपुर प्राथमिक स्कूल में एक भी टाट पट्टी नहीं है। कुछ बच्चे घर से लाई गई चटाई पर बैठे हैं, तो कुछ जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। सितंबर 2013 में आवंटित पांच हजार का बजट खर्च हो चुका है, लेकिन एक भी नई टाट पट्टी स्कूल में दिखाई नहीं पड़ रही है। चालू सत्र के तीन महीने व्यतीत हो चुके हैं, लेकिन अभी तक इस मद में फूटी कौड़ी नहीं आई है।
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सीन-2
उच्च प्राथमिक स्कूल सादीपुर में टीचर पढ़ाने के बजाए गपशप कर रहे हैं। दो छात्राएं एक टीचर का बच्चा गोद में लिए घूम रही हैं। गिनी चुनी छात्राएं कक्षा कक्ष के भीतर हैं, जबकि ज्यादातर छात्राएं बाहर मैदान में इधर-उधर घूम रही हैं। स्कूल परिसर में गंदगी है। शायद चालू सत्र में एक-दो बार ही सफाई की गई है।
सीन-3
प्राथमिक विद्यालय खेलदार के बाहर मैदान में घासपफूस खड़ी है। बच्चों के बैठने के लिए एक भी टाट पट्टी सहीसलामत नहीं है। कुछ बच्चे घरों से लाई गई बोरियों में बैठे हैं या फिर टाट पट्टी के चीथड़ों पर बैठे हैं। विकास अभिदान फंड के खाते में पिछले साल का पैसा खर्च हो चुका है। बड़ी तादाद में बच्चे जमीन पर बैठे हैं।
इंसेट
बजट मिलने पर आएगी टाट पट्टी-बीएसए
फतेहपुर। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी त्रिपाठी का कहना है कि विकास अभिदान फंड की धनराशि से स्कूल के जरूरी कार्य कराने का प्राविधान है। धनराशि बचने पर टाट पट्टी खरीदने की भी व्यवस्था है। अभी इस मद का बजट नहीं आया है। बजट आते ही स्कूलों में टाट पट्टी खरीने की व्यवस्था कराई जाएगी।
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