फतेहपुर। राजकीय नलकूप चालक मस्त और किसान पस्त हैं। जिले के 158 राजकीय नलकूप सालों से बंद पड़े हैं। आपरेटर अपने-अपने नलकूपाें का ताला-चाभी क्षेत्र के प्रभावशाली काश्तकारों को दे दिए हैं। नलकूप चला रहे काश्तकार छुटभैया किसानों के खेतों की सिंचाई में मनमाना रुपया वसूल रहे हैं। इसकी शिकायत कई बार डीएम से की गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। प्रदेश सरकार ने राजकीय नलकूप से फसलों की सिंचाई मुफ्त कर दी है। किसानों के नाम सिंचाई लिखने का झंझट खत्म हो गया है। इससे आपरेटर ड्यूटी करने में लापरवाही कर रहे हैं। नलकूप चालक क्षेत्र के प्रभावशाली किसानों को नलकूप की चाभी सुपुर्द कर दिया है। हफ्ते में एक दिन नलकूप खंड कार्यालय में हाजिरी देने जाते हैं। जिले में 672 राजकीय नलकूप हैं, जिसमें 159 नलकूप सालों से बंद पड़े हैं। इन नलकूपों के आपरेटर बिना ड्यूटी किए वेतन ले रहे हैं। गढ़ा ग्राम पंचायत के किसान सत्यप्रकाश, मंगल यादव, विजय सिंह और रज्जा यादव ने बताया कि आपरेटर नलकूप चलाने कभी नहीं आते हैं। प्रभावशाली और अपने खास किसानों को नलकूप की चाभी दिए हैं। यह लोग अपनी फसलों की सिंचाई करते हैं और दूसरे की सिंचाई में 100 रुपए घंटे की दर से अवैध वसूली करते हैं।
कोट
‘सभी नलकूप चालकों को आदेशित किया गया है कि नलकूप में रहकर ड्यूटी करें। 80 प्रतिशत आपरेटर नलकूपों में रहने लगे हैं। काश्तकारों को नलकूप की चाभी देने वाले आपरेटरों को दंडित किया जाएगा।’ - दीपक मलिक - अधिशाषी अभियंता नलकूप खंड