अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। खजुहा विकास खंड के खदरी और द्वारिकापुर में बुखार और उल्टी दस्त की बीमारी ने पैर पसार लिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा बांटी गई दवाओं से मरीजों को फायदा नहीं हुआ है। कुछ ने रिएक्शन होने की भी शिकायत की है। ऐसे में मरीज झोलाछाप की शरण में जाने को मजबूर हैं। शुक्रवार को 16 मरीजों को ट्रैक्टरों में लादकर बारा के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
विकास खंड के ककोरा गांव में बुखार और उल्टी दस्त की बीमारी पर स्वास्थ्य विभाग ने काबू पा लिया है, लेकिन इसी ग्राम पंचायत के मजरे खदरी और द्वारिकापुर में हालात गंभीर हैं। दोनों मजरों में घर-घर लोग बुखार और उल्टी दस्त की बीमारी की चपेट में हैं। छह सितंबर को अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बारा की टीम ने दोनों गांवों में मरीजों का उपचार किया था।
ग्रामीणों का आरोप है कि दवा खाने से फायदा होने की बजाय दूसरी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। द्वारिकापुर की पवन कुमारी (15), अजय (8), रामादेवी (17), रवि (17), मोहित (4), श्यामकली (40), माया देवी (35), सोनी देवी (27), दीपक (12), बाबू (65) तथा खदरी गांव की रमन कुमारी (26), महेंद्र (18), रीता (12), राजीव कुमार (28), विमल (3), विनीत (2) समेत 16 लोगों को ट्रैक्टर से लादकर बारा के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मरीजों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जो दवाएं दी थीं, उससे दिक्कत हो गई थी।
ग्रामीणों का मानना है कि गांव में बीमारी फैलने का कारण गंदगी है। यहां रास्तों में खड़ंजा तो लगा है, लेकिन जलनिकासी के लिए नालियां नहीं बनी हैं। यही कारण है रास्तों में गंदा पानी जमा रहता है। दूसरी ओर सीएमओ वीके पांडेय का कहना है कि दवा के रिएक्शन की बात सही नहीं है। हो सकता है कि मौसम के उतार-चढ़ाव से मरीजों में कोई और समस्या पैदा हो गई हो। प्रभावित गांवों में दोबारा संक्रामक रोग नियंत्रण टीम भेजी जाएगी।