फतेहपुर। पीसीएफ के क्रय केंद्रों में खरीदे गए गेहूं को एफसीआई की जांच टीम ने गोदाम में देखने के बाद मानक विहीन बताकर वापस कर दिया। इससे 20 ट्रक गेहूं बेकार हो गया। एक ट्रक गेहूं को गोदाम भेजने और वहां से फिर क्रय केंद्र में उतारने तक केंद्र प्रभारियों का आठ से दस हजार रुपये खर्च हो रहा है। इससे केंद्र प्रभारी परेशान हैं।
क्रय केंद्रों में किसानों का गेहूं खरीद कर गोदाम में पहुंचाने की जिम्मेदारी केंद्र प्रभारी की होती है। पीसीएफ (उत्तर प्रदेश सहकारी संघ) के 21 क्रय केंद्रों में गेहूं की खरीद की जा रही है। 15 अप्रैल से अब तक 23 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है। इसमें 13 हजार क्विंटल की फीडिंग हुई है और 10 हजार क्विंटल की फीडिंग कराना बाकी है। फीडिंग कराने के बाद केंद्र प्रभारी गेहूं को गोदाम भेजते हैं। पिछले तीन दिन में पीसीएफ के क्रय केंद्रों से 30 ट्रक गेहूं भेजा गया।
इसमें 20 ट्रकों के गेहूं में अधिक सिकुड़न और टूटन होने की वजह से मानक विहीन बताया गया। पीसीएफ प्रबंधक कृष्णदेव सिंह ने बताया कि 20 ट्रक गेहूं अस्वीकार होने के बाद केंद्र प्रभारियों को सिकुड़े व अधिक टूटे गेहूं को न खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। जो किसान अपने गेहूं को साफ कराकर क्रय केंद्र में लाएं, उसी को तौल कराएं और गोदाम में भेजें। जिले की जांच में 16 फीसदी तक इस बार गेहूं में सिकुड़न है। क्रय केंद्र में छह प्रतिशत सिकुड़न वाले गेहूं को खरीदने के निर्देश हैं। इसके लिए जिले से जो रिपोर्ट भेजी गई है। उसमें अभी तक संशोधन होकर नहीं आया है।