अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। घरों में शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। सामुदायिक शौचालयों का भी आधा अधूरा काम हो पाया है। इसके बावजूद शहर के 22 वार्ड ओडीएफ घोषित हो चुके हैं। 31 मार्च तक शत प्रतिशत शहर को खुले में शौच मुक्त घोषित करने का लक्ष्य है। ऐसे में अभिलेखों में ही ओडीएफ घोषित होने की चर्चाएं तेज हो चली हैं।
दिसंबर 2016 में शहर को अमृत योजना में चयन किया गया था। इसके बाद शौचालय विहीन घरों का सर्वे कराया गया और छह हजार गृहस्वामियों से आवेदन जमा कराए गए थे। इनमें अभी तक सिर्फ 783 परिवारों को आर्थिक मदद की दोनों किस्त आवंटित की गई है।
नगर पालिका का दावा है कि इन घरों में शौचालयों का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन अभी तक पांच हजार से अधिक घरों मेें शौचालयों का निर्माण नहीं हो पाया है। इतना ही नहीं पूरे शहर में 24 स्थानों पर सामुदायिक शौचालयों का निर्माण प्रस्तावित था, जिनमें 11 स्थानों पर ही शौचालयों का निर्माण हो पाया है। जहां शौचालयों का निर्माण हो भी गया है, उनमें शौच जाने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में साफ है कि जब शौच जाने के इंतजाम ही नगर पालिका पूरे नहीं कर पाई है, तो शहर 31 मार्च तक कैसे ओडीएफ घोषित हो पाएगा। इसके बावजूद नगर पालिका के अभिलेखों में 22 वार्ड ओडीएफ घोषित हो चुके हैं।
नगर पालिका के अवर अभियंता निर्माण राजेंद्र वर्मा का कहना है कि शासन से जैसे-जैसे बजट आ रहा है, वैसे-वैसे निजी शौचालय निर्माण के आवेदकों को किस्तें आवंटित की जा रही हैं। प्रयास है कि तय तिथि तक सभी घरों में शौचालयों का निर्माण पूरा हो जाएगा। सामुदायिक शौचालयों में पानी के इंतजाम पूरे किए जा रहे हैं। कुछ चिह्नित स्थानों पर जमीन की व्यवस्था अभी तक नहीं हो पाई है। यहां शौचालय निर्माण के लिए जमीन की तलाश की जा रही है।