देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्ण का पूजन
फर्रुखाबाद। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की देवउठनी (देवोत्थान) एकादशी पर भगवान विष्णु का विधिविधान से पूजन किया गया। इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। घरों में जमीन पर पिसे चावल का चौक बनाकर गन्ना, सिंघाड़े, शकरकंद आदि से पूजन किया गया।
देवोत्थान एकादशी पर्व की सनातन धर्म में खासी मान्यता है। बुधवार सुबह से ही घरों में त्योहार की तैयारियां शुरू हो गईं। पिसे चावल से जमीन पर चौक बनाया गया। उस पर गौरी-गणेश, भगवान विष्णु का पूजन सिंघाड़े, गन्ने से किया गया। साधकों ने एकादशी का उपवास रखकर भगवान विष्णु से आशीर्वाद लिया। मंगलवार रात से बाजार में सिंघाड़े, शकरकंद और गन्ना की बिक्री शुरू हो गई। चौराहों-तिराहों के अलावा शहर के बाहरी मार्गों पर खरीदारों की दिन भर भीड़ लगी रही।
खूब बिके गन्ने, सिंघाड़े, शकरकंद
सुबह के वक्त गन्ना 10 रुपये में एक और सिंघाड़े, शकरकंद 25 रुपये किलो तक में बिकी। शाम को पांच रुपये में दो गन्ने और शकरकंद व सिंघाड़ा 15 रुपये किलो बिका। लोगों ने खूब खरीदारी की।
तुलसी का शालिगराम संग हुआ विवाह
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को तुलसी विवाह का आयोजन किया गया। तुलसी का विवाह शालिगराम के साथ किया गया। शालिगराम भगवान विष्णु का रूप हैं। सुहागिनों ने तुलसी महारानी का सोलह शृंगार किया। सभी चीजों का दान भी किया गया। कुछ स्थानों पर आयोजन भी किए गए।