समाजवादी पार्टी में टिकट के बंटवारे को लेकर सत्ता और संगठन के बीच छिड़ी जंग में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इसके बाद भी मुख्यमंत्री के लड़ाके चुनाव में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं।
हालांकि बदलते राजनैतिक परिदृश्य के चलते अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र और कायमगंज अति संवेदनशील हो गया है। यहां मुख्यमंत्री और संगठन की ओर से अलग-अलग प्रत्याशी उतारे जाने से जहां पार्टी कार्यकर्ता पशोपेश में पड़ा है। वहीं दूसरी तरफ सपा समर्थित मतदाता भी भ्रमित हो रहा है।
अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र सत्ता और संगठन में छिड़े महाभारत में कुरुक्षेत्र बन सकता है। इस क्षेत्र से प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने डा. सुबोध यादव को प्रत्याशी बनाया है। वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विधायक नरेंद्र सिंह को अपनी सूची में शामिल किया है।
विधायक नरेंद्र सिंह यादव और डा. सुबोध यादव के एक ही पार्टी से आमने-सामने होने से इस विधानसभा क्षेत्र में संवेदनशीलता बढ़ गई है। अधिकारी भी इसको लेकर दबी जुबान से चर्चा करने लगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र कुरुक्षेत्र बन सकता है, जबकि विधायक नरेंद्र सिंह यादव का दावा है कि वह हर हाल में चुनाव लड़ेंगे। यदि पार्टी ने नहीं टिकट दिया तो वह चुनाव लड़ने में पीछे नहीं हटेंगे।
उनका कहना है कि अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र में उन्होंने जनता का दिल जीता है। उनके पिता स्व. बाबू राजेंद्र सिंह से उन्हें राजनीति विरासत में मिली है। वहीं दूसरी तरफ डा. सुबोध यादव का कहना है कि नरेंद्र सिंह ने इस विधानसभा क्षेत्र में कोई विकास कार्य नहीं कराया है। जनता उनसे ऊब चुकी है। जनता को विकल्प चाहिए था।
अभी तक कोई विकल्प नहीं मिल रहा था। इस वजह से नरेंद्र सिंह चुनाव जीतते आए हैं। अब जनता ने उन्हें पूरी तरह से नकार दिया है। डा. सुबोध यादव का कहना है कि मुख्यमंत्री की ओर से भी उन्हें चुनाव लड़ने की हरी झंडी है और प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने उनके नाम की सूची जारी कर दी है।
इन हालातों के चलते आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी में छिडे़ महाभारत का कुरुक्षेत्र अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र बन सकती है। इसी तरह से कायमगंज विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री और सत्ता पक्ष से अलग-अलग प्रत्याशी घोषित होने से यहां की भी संवेदनशीलता बढ़ गई है।