स्टेशन मास्टर को जीआरपी के जवानों ने पीट दिया। इसकी जानकारी जब वेंडरों को लगी तो वे हड़ताल पर चले गए। सूचना पर पहुंचे जीआरपी के दरोगा ने मामला रफा-दफा कराया।
शुक्रवार को फर्रुखाबाद से आगरा फोर्ट जाने वाली ट्रेन संख्या 55331 कायमगंज स्टेशन पर तड़के 5 बजकर 51 मिनट पर पहुंची। जानकारी के मुताबिक ट्रेन के गार्ड विवेक ने उस समय कायमगंज स्टेशन पर ड्यूटी पर तैनात स्टेशन मास्टर अमरेंद्र सिंह को वॉकीटॉकी पर सूचना दी कि सर्दी ज्यादा है।
इसलिए चाय पीना चाहते हैं। इस पर स्टेशन मास्टर ने वेंडर धर्मेंद्र कुमार को चाय ले जाने के लिए सूचना भिजवाई। स्टेशन मास्टर के अनुसार वेंडर जब गार्ड को चाय देकर वापस लौट रहा था, तभी जीआरपी के सिपाहियों ने रोक लिया और कहा कि पहले चाय उन्हें क्यों नहीं दी। इसके बाद जीआरपी के जवानों ने वेंडर को चौकी में बैठा लिया।
स्टेशन मास्टर का कहना था कि वेंडर को सुबह 7 बजे छोड़ा गया। वेंडरों ने घटना की जानकारी उन्हें आकर दी। स्टेशन मास्टर ने माइक पर एनाउंस कर दोनों जीआरपी के सिपाहियों को बुलाया। स्टेशन मास्टर का आरोप था कि सिपाहियों ने आकर कार्यालय में वजह पूछने पर उनके साथ अभद्रता की और कार्यालय से बाहर ले जाकर लात मारी।
वहीं आफ डयूटी के बाद जान से मारने की धमकी देते हुए किसी मामले में झूठा फंसाने की धमकी भी दी। घटना की जानकारी स्टेशन मास्टर ने इज्जतनगर मंडल के उच्चाधिकारियों को दी। वहीं जीआरपी व आरपीएफ चौकी को अलग-अलग मेमो भेजकर दोनों सिपाहियों के नामोें का उल्लेख किया।
स्टेशन मास्टर का कहना था कि दोनों जगह उनके मेमो रिसीव नहीं किए गए। इस संबंध में एसएम ने जीआरपी एसपी को भी सूचना दी है।
उधर, सिपाहियों ने घटना की जानकारी जीआरपी एसओ फर्रुखाबाद व उच्चाधिकारियों को दी। रेलवे के वेंडर को चौकी पर बैठा लेने के मामले में स्टेशन पर सुबह मौजूद सभी वेंडर एकत्र हो गए और उन्होंने चाय आदि बनाना बंद कर दिया और विरोध करने लगे। उनका आरोप था कि जीआरपी पुलिस का यह रवैया अच्छा नहीं था।
उन्हें बेवजह परेशान किया जाता है। जांच करने पहुंचे जीआरपी के एसआई के समझाने पर वेंडरों ने कामकाज शुरू किया। मामले की जानकारी पर जीआरपी फर्रुखाबाद के एसआई राजेश दुबे मौके पर जांच करने पहुंचे। एसआई ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पाया गया कि मारपीट का आरोप सही नहीं है। विवाद हुआ है।
चाय के मामले में एसआई ने बताया कि चाय देने गार्ड को कोई बच्चा गया था। नाबालिग होने पर उसे सिपाहियों ने डांट दिया था।