अमृतपुर। सावन का महीना भगवान भोलेनाथ की भक्ति में डूबा हुआ है। आस्था की इस अनोखी छटा में बच्चे भी पीछे नहीं हैं। पैरों में घुंघरू, कंधों पर सजी कांवड़ और होंठों पर बम-बम भोले का जयघोष कर नन्हें कांवड़िये पंचाल घाट से गंगाजल भरकर शिवालयों की ओर रवाना हो रहे हैं। उनकी श्रद्धा और उमंग हर किसी का मन मोह रही है।
हरदोई जिले के शाहाबाद निवासी अभिषेक (14), अंशू (15), बबलू (17) और अनुभव (13) ने अपनी कलश कांवड़ में 21 लीटर गंगाजल भरा और सकायें स्थित प्राचीन शिव मंदिर में जलाभिषेक के लिए पैदल यात्रा शुरू की। बच्चों का कहना है कि सावन में भगवान शिव की आराधना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पहली बार कांवड़ यात्रा पर निकले इन बच्चों के चेहरे पर अलग ही उत्साह और भक्ति का भाव दिखाई दिया।
वहीं, मैनपुरी जिले के औरेन पड़रिया गांव का मात्र पांच वर्षीय शिवा भी अपने पिता के साथ कांवड़ लेकर चल रहा था। नन्हें कदमों से पिता का साथ निभाते हुए वह भी गंगाजल लेकर भोलेनाथ के दरबार की ओर बढ़ता नजर आया। उसकी मासूम आस्था और उत्साह ने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
पांचाल घाट पर दिनभर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालुओं का मानना है कि सावन में गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।