फर्रुखाबाद। सुई-धागे पर पैनी नजर से तैयार होने वाले 250 करोड़ की जरी कारोबार को अमेरिकी टैरिफ का ग्रहण सताने लगा है। जिले के हर कस्बा ही नहीं गांवों तक जरदोजी कारीगरी फैली हुई है। यहां की रहमानी इंब्राइडरी समेत दो कारोबारी जरी से तैयार माल को निर्यात करते हैं। हालांकि 100 से अधिक कारोबारी ऐसे हैं जो अपना माल दिल्ली के निर्यातकों को देते हैं। अब जरी कारोबारियों को महंगाई बढ़ने की आशंका सजाने लगी है।
शहर के अधिकांश मुस्लिम मोहल्लों के साथ बड़ी संख्या में हिंदू परिवार भी जरदोजी कारोबार से जुड़े हैं। कंपिल, कायमगंज, कमालगंज, मोहम्मदाबाद, राजेपुर, रुदायन, शमसाबाद आदि कस्बों और आसपास के सैकड़ों गांवों में यह कारोबार कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है। घर में महिलाएं फुर्सत के क्षणों में शानदार लहंगे, दुपट्टे, साड़ी, सूट आदि तमाम तरह के आइटम तैयार करती हैं। इससे परिवारों का भरण पोषण होता है।
जिले में हर साल करीब 250 करोड़ रुपये का कारोबार बताया जा रहा है। यहां तैयार जरी का माल यूके, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, यूएसए, मलेशिया, दुबई, यूरोप और गल्फ के कई देशों में निर्यात होता है। कारोबारियों को अमेरिका की ओर से 25 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद महंगाई बढ़ने से मांग घटने की आशंका जताई जा रही है।
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फोटो-30, मुजफ्फर हुसैन रहमानी
नखास निवासी जरदोजी एसोसिएशन के अध्यक्ष मुजफ्फर हुसैन रहमानी बताते हैं कि अमेरिकी टैरिफ जरी कारोबार को बड़ा झटका दे सकता है। वह कई देशों में माल निर्यात करते हैं। जनता आर्ट का माल भी विदेशों में जाता था। अब इस मामले को सरकार गंभीरता से ले। अमेरिका की भरपाई के लिए किसी अन्य देश को निर्यात का रास्ता खोला जाए।
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फोटो-31, हाजी सादाब हुसैन
जरी कारोबारी हाजी सादाब हुसैन ने बताया कि बेशक वह सीधे माल निर्यात नहीं करते, मगर तमाम कारोबारियों के यहां तैयार माल दिल्ली, नोएडा के निर्यातकों को दिया जाता है। वहां से विदेश को माल जाता है। आज जो माल 100 रुपये का बिकता है, वह टैरिफ के बाद 125 रुपये का हो जाएगा। इसका यहां के कारोबारियों पर निकट भविष्य में बुरा असर पड़ना तय है।