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मरीजों का भोजन खाने के आरोप से दुखी डाक्टर विरोध पर उतरे

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केएम हाउस में काली पट्टी बांध कर विरोध करते डाक्टर व स्वास्थ्य कर्मी। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबानद। कोरोना मरीजों की चाय पीने व भोजन खाने के सीडीओ के बयान से दुखी एल-1 अस्पताल बरौन सीएचसी के डाक्टर विरोध पर उतर आए हैं। गुरुवार को उन्होंने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया और सीडीओ को मौके पर बुलाने की जिद पर अड़ गए। जानकारी पर सीएमओ पहुंचे लेकिन वार्ता विफल रही। दोपहर बाद तक किसी ने खाना भी नहीं खाया। देर रात मौके पर डीएम भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि गलतफहमी में सीडीओ कोई बात कह गए होंगे। इसके बाद वह भी चले गए।
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कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती करने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरौन को एल-1 अस्पताल बनाया गया है। 30 बेड की क्षमता वाले इस अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव 27 मरीज भर्ती हैं। तीन शिफ्टों में छह डाक्टरों सहित 25 कर्मचारियों की ड्यूटी है। मरीजों को भोजन के लिए जिस ठेकेदार को जिम्मेदारी मिली है, वह कोरोना योद्धा डाक्टरों पर भी भारी है। पहले आरोप लगा कि मरीजों की चाय डाक्टर पी जाते हैं।
बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक के दौरान सीडीओ डा.राजेंद्र पैंसिया ने भी कहा कि अस्पताल के किचन से मरीजों को जाने वाला चाय-नाश्ता डाक्टर व स्टाफ ले लेता था। यह बात डाक्टरों को नागवार गुजर गई। गुरुवार सुबह आठ बजे से दो बजे की शिफ्ट में डाक्टर व कर्मचारी ड्यूटी पर गए। शेष डाक्टर व कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विश्राम स्थल केएम हाउस में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसी ने भोजन भी नहीं किया। करीब ढाई बजे सीएमओ डॉ.चंद्रशेखर केएम हाउस पहुंचे और डाक्टरों को समझाकर काम पर लौटने को कहा। इस पर उन्होंने कहा कि आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया जाएगा। वार्ता विफल होने पर सीएमओ लौट गए। देर रात डीएम भी पहुंचे। उन्होंने भी समझाया और वापस चले गए।
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एल-1 अस्पताल के डा.राजीव यादव ने बताया कि आईएमए और प्रांतीय चिकित्सा सेवा दोनों संगठन जो निर्णय लेंगे, उसी के अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी। इस दौरान डा.विकास सिंह पटेल, डा.रजत कटियार, डा.ऋषि नाथ गुप्ता व स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।
सीएमओ डा.चंद्रशेखर से इस संबंध में पूूछने का प्रयास किया गया तो वह चुप्पी साध गए। कुछ भी कहने से मना कर दिया। वहीं जनपद में ही मौजूद संयुक्त निदेशक सरोज बाला ने कहा कि डाक्टरों के आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया जाएगा। डाक्टरों से वार्ता कर बीच का रास्ता निकाला जाएगा। मरीजों को मैन्यू के अनुसार भोजन व नाश्ता न मिलने पर वह ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई के लिए सीएमओ को निर्देशित करेंगी।
दूसरी ओर मुख्य विकास अधिकारी डा.राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि चाय-नाश्ता व खाना के पैकेट रास्ते से चिकित्सीय टीम ले लेती है। यह रिपोर्ट उन्हें एएमए व ठेकेदार ने दी। तभी यह बात कही। विरोध प्रदर्शन करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि मुख्यमंत्री विरोध प्रदर्शन पर रोक लगा चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग संभालने की जिम्मेेदारी सीएमओ की है। आरोप लगाना तो दूर वह सभी डाक्टरों को पहचानते तक नहीं।
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