जानी-मानी साहित्यकार महादेवी वर्मा के परिनिर्वाण दिवस पर साहित्यकारों, समाजसेवियों एवं कवियों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान ‘आग की देवी महादेवी वर्मा’ पुस्तक का उनके चरणों में रखकर लोकार्पित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि महादेवी वर्मा का साहित्य आंसू नहीं आग का दरिया है।
शहर के पल्लापार्क स्थित तिराहे पर महादेवी वर्मा की प्रतिमा पर सुबह आठ बजे साहित्यकार पहुंचे। साहित्यकार डा. श्यामलाल निर्मोही, मुसर्रद बेगम ‘साद’ तथा डा. राजीव श्रीवास्तव से संपादित पुस्तक ‘आग की देवी महादेवी वर्मा’ को चरणों में रखकर लोकार्पित किया गया।
डा. श्यामलाल निर्मोही एवं डा. राजकुमार सिंह ने कहा कि महादेवी वर्मा एक छायावादी कवियत्री थीं। वह आंसू नहीं आग की देवी थीं। उनकी कविता ‘शलभ में शापमय वर हूं’ में नारी चित्रण है। उसमें महादेवी वर्मा कहती हैं कि नारियां शापमय वरदान हैं।
क्योंकि वे सृष्टि की मूलाधार हैं, परंतु उदंड पतंगों को भष्म करने की उनमें क्षमता भी है। उनके साहित्य में प्रयुक्त ‘मैं’ उनका ‘स्व’ न होकर नारी जाति का ‘हम’ हैं।
प्रतिमा पर माल्यार्पण, श्रद्धांजलि देने वालों में कृष्णकांत अक्षर, विधायक नागेंद्र सिंह, प्रबोधिका के अध्यक्ष डा. राजकुमार सिंह, जवाहर सिंह गंगवार, डा. माधुरी दुबे, भूपेंद्र सिंह संजय गर्ग, निमिष टंडन, डा. श्रीकृष्ण गुप्ता, अरुण प्रकाश तिवारी ‘ददुआ’, भूपेंद्र, सुजीत, अक्षय दीक्षित, नलिन श्रीवास्तव, दीपक मिश्रा, कुलभूषण श्रीवास्तव, डा. रामकृष्ण राजपूत, डा.अरशद मंसूरी, सरफराज हुसैन, विनय अग्रवाल, उदय सिंह, जमुर्रद बेगम, सुनील तिवारी आदि थे।