तराई इलाके कुंआखेड़ा के गन्ना किसान पेराई सत्र के अंतिम चरण अप्रैल में
पर्ची मिलने से नाराज हैं। खेत में गन्ने की फसल खड़ी है। आए दिन बारिश से
फसल का कटान नहीं हो पा रहा है। जरूरत पर इन्हें पर्ची नहीं मिलीं। इससे
इनको अपना अधिकांश गन्ना रूपाप़ुर चीनी मिल को 200 रुपये क्विंटल की दर से
बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा था। किसानों ने बताया कि कई दिन चक्कर काटने
के बाद चीनी मिल से 500 रुपये देकर पर्ची हाथ लगी हैं।
कुंआखेड़ा तराई
क्षेत्र के गन्ना किसान इस बार चीनी मिल के सौतेले व्यवहार से खासे नाराज
हैं। यह अधिकांश गन्ना इस बार रूपापुर चीनी मिल को दे चुके हैं। सट्टे के
बावजूद पर्ची न मिलने से इनमें रोष है। अकाखेड़ा गांव के ओमकार, अमरसिंह,
सूबेदार, सतीश, भिखारीलाल, दुलारे लाल, ज्ञानसिंह ने बताया कि उन्हें पहले
पखवारे में पर्ची दी जानी चाहिए थी लेकिन अप्र्रैल
में पर्चियां दीं गईं।
मिल के समय पर पर्ची न देने से इस बार कुंआखेड़ा क्षेत्र के किसानों को
लगभग एक हजार ट्राली गन्ना रूपापुर मिल को 200 से 250 रुपये क्विंटल रेट
में बेचने को मजबूर होना पड़ा था। स्थानीय चीनी मिल में काम करने वाले
कर्मचारियों के फर्जी सट्टे कर उन्हें पर्चियां दी जा रही हैं। वास्तविक
गन्ना किसानाें को नजरअंदाज किया जा रहा है। गन्ना ग्राम सेवक हर साल सर्वे
सट्टा में खेल करते हैं। इससे मिल को नो केन की स्थिति से गुजरना पड़ता
है।
किसानों ने बताया कि रूपापुर चीनी मिल के बंद हो जाने पर उन्हें
मजबूर होकर यहां की चीनी मिल के चक्कर काटने पड़े । पांच सौ रुपये देकर
पर्ची लेना पड़ा। बताया कि अब पर्ची मिली है तो गर्मी और बारिश के कारण
गन्ने की कटान नहीं हो पा रही है। ऐसा ही मौसम रहा तो गन्ने के कटान न
होने और नो केन की स्थिति में मिल को बंद भी किया जा सकता है। ऐसे में उनके
सामने गन्ने को जलाने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाएगा।