- 2009 में ट्रेन में यात्री से मारपीट के बाद आरोपियों को छुड़ाने के लिए भीड़ ने किया था पथराव
- रेलवे पुलिस के जवान भी हुए थे घायल, सजा पर आज होगी सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। कन्नौज रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में यात्री से मारपीट और पकड़े गए आरोपियों को छुड़ाने के लिए पथराव करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश, कक्ष संख्या सात अंकित कुमार मित्तल ने तीन आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में लेने के आदेश दिए। सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 15 अक्तूबर की तारीख तय की है।
अभियोजन के अनुसार, 14 मई 2009 को रेलवे सुरक्षा बल के जवान ट्रेन संख्या 472 डाउन में यात्री सुरक्षा की ड्यूटी पर थे। ट्रेन में जेएनवी रोड फतेहगढ़ निवासी चंद्रप्रकाश त्रिपाठी अपनी मां और बहन के साथ यात्रा कर रहे थे। गुरसहायगंज स्टेशन से कुछ लोगों के सवार होने के बाद सीट से उठाने को लेकर विवाद हुआ। चंद्रप्रकाश के साथ मारपीट और महिलाओं से अभद्रता की गई। बीच-बचाव करने पहुंचे रेलवे सुरक्षा बल के जवानों से भी हाथापाई हुई और एक जवान की वर्दी फाड़ दी गई। जवानों ने तीन आरोपियों को पकड़ लिया। पकड़े जाने के बाद आरोपियों ने फोन कर साथियों को छुड़वाने के लिए मदद मांगी। ट्रेन के कन्नौज रेलवे स्टेशन पहुंचने पर आरोपियों के करीब डेढ़ सौ समर्थक जुट गए। भीड़ ने ट्रेन पर पथराव कर दिया और पकड़े गए तीनों लोगों को छुड़ाकर ले गई। पथराव में रेलवे सुरक्षा बल के कई जवान घायल हुए और ट्रेन के शीशे भी टूट गए। घटना के कारण ट्रेन करीब एक घंटे से अधिक समय तक स्टेशन पर खड़ी रही। ट्रेन सुरक्षा ड्यूटी में तैनात एचसी अशोक कुमार राय की तहरीर पर पुलिस ने जनपद कन्नौज की कोतवाली गुरसहायगंज के गांव डुडवा बुजुर्ग निवासी शराफत हुसैन, मझपुरवा निवासी रियाजुल खां और इंद्रानगर निवासी मुशीर सहित करीब 150 अज्ञात लोगों के विरुद्ध जीआरपी थाना फर्रुखाबाद में प्राथमिकी दर्ज की। सुनवाई के दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता श्रवण कुमार ने साक्ष्यों और गवाहों को पेश किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को दंगा करने, यात्रियों और रेलवे सुरक्षा बल के जवानों को चोट पहुंचाने, गाली-गलौज व धमकी देने तथा रेलवे अधिनियम और क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट के तहत दोषी माना।