फर्रुखाबाद। पुलिस ऑफिस फतेहगढ़ में रिश्वत लेते दबोचा गया वरिष्ठ लेखाकार 11 वर्ष से पटल पर डटा था। उसकी आए दिन रिश्वतखोरी की शिकायतें होती रहीं।
इसके चलते बीच में एक-दो बार पटल में कुछ समय के लिए ही परिवर्तन किया गया। पर उसके बाद वह अपने मलाईदार पटल पर ही पहुंच गया। कार्यालय में पुलिस कर्मियों के भुगतान में मनमानी करता था।
पुलिस ऑफिस के वरिष्ठ लेखाकार हरेंद्र चौहान की वर्ष 2014 में लेखा विभाग में तैनाती हुई थी। इसके बाद से वह एक ही पटल पर जम गया। रिश्वत के मामले में कई बार शिकायतें भी हो चुकी थी। हाकिमों का करीबी होने और पहुंच के चलते वरिष्ठ लेखाकार के खिलाफ विभाग से कोई कार्रवाई नहीं की गई। बस कुछ दिनों के लिए उसके पटल में परिवर्तन किया गया।
बाद में स्थिति जस की तस होती गई। जबकि यहां अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है। जिलाधिकारी कार्यालय भी 10 कदम की ही दूरी पर है। खास बात तो यह है कि तीन वर्ष में कर्मचारी के पटल परिवर्तन का शासनादेश भी उस पर लागू नहीं किया गया। उसके रिश्वतखोरी और अड़ियल रवैया से पुलिस कर्मी खासे परेशान थे। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ लिपिक का कमीशन का प्रतिशत दिनोंदिन बढ़ता गया। अब देयकों के भुगतान का कमीशन बढ़कर 20 प्रतिशत पहुंच गया था।
आखिरकार मुख्य आरक्षी ने आजिज आकर विजिलेंस टीम का सहारा लिया और रंगे हाथों उसे रिश्वत लेते पकड़वा दिया। विजिलेंस टीम के अधिकारियों ने बताया कि वरिष्ठ लेखाकार के रिश्वतखोरी रवैया से पुलिस कर्मी काफी परेशान थे। उसकी कई बार शिकायतें भी की गईं। आखिरकार यह मामला उन लाेगों तक पहुंचा और रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोच लिया गया।
एसपी ऑफिस के लिपिक सहमे
पुलिस ऑफिस के वरिष्ठ लेखाकार हरेंद्र चौहान को विजिलेंस टीम ने 15 हजार रुपये रिश्वत लेते दबोच लिया। इसके बाद ऑफिस का नजारा ही बदल गया। कार्यालय में कई पटलों की कुर्सी खाली थीं। वहीं काम कर रहे कुछ लिपिक सहमे हुए दिखे। कुछ पूछने पर वह जवाब देने से भी बचते रहे। पटलों पर किसी लिपिक की नाम पट्टिका भी नहीं लगी थी।
वहीं परिसर में अलग-अलग टोलियों में खड़े पुलिस कर्मी चर्चा करते दिखे। एक सिपाही बोला कि वरिष्ठ लेखाकार कोई भी काम बिना रिश्वत के नहीं करता था। आखिर कहां तक हर काम के लिए रिश्वत दी जाए। इसको लेकर वरिष्ठ लेखाकार से पूर्व में कई बार नोकझोंक भी हो चुकी और शिकायतें भी की जा चुकी थीं। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।