फर्रुखाबाद। वरिष्ठ लेखाकार के पकड़े जाने के बाद यूपी 112 का एक सिपाही पुलिस ऑफिस पहुंचा। तभी वहां विजिलेंस टीम के दो सदस्य भी पहुंच गए।
सिपाही वहां मौजूद कर्मचारियों व टीम के सदस्यों से पूछ रहा था कि बड़े बाबू (वरिष्ठ लेखाकर हरेंद्र चौहान) को कहां रखा है। उनसे मिलना है। एक बार उनसे हमें मिलाओ। उनका बेटा मेरठ से आ रहा है। इस बारे में न तो विजिलेंस टीम ने कुछ बताया और न ही वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों ने इस पर सिपाही हंगामा करने लगा।
विजिलेंस टीम ने कुछ कहा तो सिपाही कहने लगा कि ...कोई भगवान नहीं है। सबसे बड़े तो भगवान ही है। यह कहते ही वहां मौजूद कर्मचारियों ने उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। पर वह जोर-जोर से अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने लगा। तभी पास के कार्यालय में मौजूद सीओ मोहम्मदाबाद अजय वर्मा बाहर निकल आए और उन्होंने उसे शांत किया।
इसके बाद वह लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में पहुंच गया। वहां वह उस कमरे में घुस गया, जहां विजिलेंस टीम थी। तब टीम ने उसे समझाकर बाहर निकाला। बाद में उसने खुद बताया कि यूपी 112 में सिपाही है। (संवाद)
पहले भी रिश्वत लेते कर्मचारी चढ़ चुके विजिलेंस के हत्थे
फर्रुखाबाद। जिले में रिश्वत लेते शुक्रवार को कोई पहली बार गिरफ्तारी नहीं हुई, इससे पहले पांच कर्मचारी रिश्वत लेते गिरफ्तार हो चुके हैं। वह जेल से छूटने के बाद विभाग में ही जिम्मेदारी फिर संभालते दिख रहे हैं।
पिछले दिनों कायमगंज तहसील में एक लिपिक का रिश्वत मांगने का ऑडियो वायरल हुआ था। हालांकि बाद में मामला दब गया। शुक्रवार को पुलिस ऑफिस में जब वरिष्ठ लेखाकार 15 हजार रुपये रिश्वत लेते दबोचा गया तो सभी विभागों में खलबली मच गई। इससे पहले भी जनपद में पांच अन्य कर्मचारी रिश्वत लेते दबोचे जा चुके हैं।
खास बात तो यह है कि इसमें पंचायती राज विभाग, जिला पंचायत, राजस्व विभाग, बैंक शामिल हैं। शुक्रवार को पुलिस ऑफिस में रिश्वतखोरी का खुलासा होने से चर्चाओं का बाजार गर्म है। तहसील कायमगंज व अमृतपुर के राजस्व निरीक्षक भी रिश्वत लेते एंटी करप्शन टीम के हत्थे चढ़ चुके हैं। दो माह पहले सीएमओ कार्यालय में भी विजिलेंस टीम भ्रष्टाचार की जांच के लिए छापा मार चुकी है। (संवाद)
रिश्वतखोरी की घटनाओं पर एक नजर
-सितंबर 2025: सीबीआई ने फर्रुखाबाद के संकिसा स्थित यूपी ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक समेत दो लोगों को केसीसी ऋण की सीमा बढ़ाने के लिए 30 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया था।
-जनवरी 2024: सदर तहसील के एक कानूनगो (राजस्व निरीक्षक) और उसके एक निजी सहयोगी को एंटी करप्शन टीम ने 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
-दिसंबर 2023: पंचायती राज विभाग के लेखाकार राकेश कुमार को सेवानिवृत्ति से 10 दिन पहले एंटी करप्शन टीम ने 10 हजार रुपये रिश्वत लेते उनके कार्यालय से ही दबोच लिया था। लेखाकार ने सफाईकर्मी से निलंबन अवधि के वेतन भुगतान के लिए 80 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
-नवंबर 2023: एक लेखपाल को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन टीम ने गिरफ्तार किया था।
-फरवरी 2022 : जिला पंचायत कार्यालय में ठेकेदार को निर्माण कार्य का भुगतान करने के लिए लिपिक रजनेश यादव को एंटी करप्शन टीम ने 50 हजार रुपये रिश्वत लेते कार्यालय से ही दबोच लिया था। जेल से छूटने के बाद वह कार्यालय में ड्यूटी कर रहे हैं। फिलहाल जिम्मेदारों का करीबी भी बताया जा रहा है।
फोटो- 27 पुलिस ऑफिस में वरिष्ठ लेखाकार कार्यालय में हंगामा करने वाले सिपाही को समझाते सीओ अजय