फोटो- 34 डूडा कार्यालय में संचालित राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन का दफ्तर। संवाद
फर्रुखाबाद। महिलाओं को स्वावलंबन से जोड़ने वाली राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) एक साल से बंद पड़ी है। इसके चलते इस योजना से जुड़ी महिलाएं बेरोजगार हो गई हैं।
विभागीय अधिकारी उन्हें दिलासा दे रहे हैं कि जल्द ही एनयूएलएम 2.0 योजना लागू की जाएगी। वर्ष 2013 में एनयूएलएम योजना शुरू हुई थी। जिले में इस योजना के तहत अब तक करीब 400 महिला समूह गठित हैं। इनमें से करीब 150 समूह सक्रिय हैं। प्रत्येक समूह में 10-10 महिला सदस्य जुड़ी हैं।
इन समूहों की महिलाएं अगरबत्ती, मोमबत्ती, धूपबत्ती निर्माण व खिलौने आदि बनाने का कार्य करती हैं। समूह गठित करने के बाद इनको बैंक से ऋण दिलाकर बड़ा काम कराया जाता है। इस योजना के पीछे मकसद था कि महिलाएं आर्थिक तौर पर स्वावलंबी बन सकें।
मगर जिले में सितंबर 2024 से एनयूएलएम योजना बंद पड़ी है। योजना संचालित न होने से नए समूह गठित नहीं हो पा रहे हैं। वहीं जो पुराने समूह चल रहे हैं, उन्हें कच्चा माल लेने के लिए ऋण नहीं मिल पा रहा है। समूह से जुड़ी महिलाओं ने दबी जुबान से बताया कि योजना बंद होने से ऋण नहीं मिल पा रहा, जिससे कच्चा माल नहीं खरीद पातीं। विभागीय अधिकारी यह कह रहे हैं कि एनयूएलएम 2.0 योजना जल्द शुरू हो जाएगी। उसी आस में बैठी हैं।
पूरे प्रदेश में सितंबर 2024 से एनयूएलएम योजना बंद चल रही है। सरकार एनयूएलएम 2.0 योजना जल्द ही लागू करने वाली है। योजना लागू होते ही नए महिला समूहों का गठन किया जाएगा। वहीं पुराने समूहों को ऋण दिलवाए जाएंगे। वर्तमान में जिले में लगभग 400 महिला समूह गठित हैं।
- कुलदीप कुमार, सिटी मिशन मैनेजर