ये दो केस तो बानगी भर है। अमृतपुर तहसील क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की गाड़ी पटरी से उतर गयी है। शिक्षक खुद प्राथमिक शिक्षा की जड़ों में मट्ठा डालने का काम रहे हैं। क्षेत्र में 178 प्राथमिक और 102 जूनियर विद्यालय हैं। शिक्षक अपनी मर्जी के मालिक है। कई स्कूल तो अक्सर बंद बने रहते हैं।
जो खुलते है वहां शिक्षक समय पर नहीं पहुंचते। गंगापार क्षेत्र में हर वर्ष आने वाली बाढ़ नौनिहालों के भविष्य को चौपट कर रही है। बाढ़ के समय वैसे भी यहां दर्जनों विद्यालय बंद कर दिये जाते हैं। कटरी क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षक बदमाशों के भय की वजह से नहीं पहुंच पा रहे हैं।
गांव के ही गंगाराम, रामवीर, धर्मेंद्र, माखन लाल, रामरहीश से जब बातचीत की गयी, तो उन्होंने बताया कि इस विद्यालय में शिक्षा के नाम पर मखौल किया जा रहा है। कभी भी 10 बजे से पहले कोई अध्यापक नहीं आते। 10 बजे आकर 11 बजे तक ताला बंद करके देवेंद्र अपने घर को चले जाते हैं।
कुड़री सारंगपुर प्राथमिक में बनाये गये अतिरिक्त कक्षाकक्ष में लोग जानवर बांध रहे हैं। इन जानवरों की वजह से इस कक्षाकक्ष में हमेशा गोबर भरा रहता है। गंगापार क्षेत्र के विद्यालय कुड़री सारंगपुर में पढ़ने वाले बच्चे मिड-डे-मील के लिए तरस रहे हैं। यहां के रहने वाले लोग बताते हैं कि आठ दिन में एक बार मिड-डे-मील बनाकर बच्चों को दिया जाता है। मिड-डे-मील भी मीनू के अनुसार नहीं बनाया जाता है।
चावल में हल्दी मिर्च डालकर तहरी बना दी जाती है। बुधवार के दिन बच्चों को प्राथमिक विद्यालयों में दूध बांटने का निर्देश है। गंगा के इस तरफ कार्यरत प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को दूध और न ही फल मिलता है। इस संबंध में अमृतपुर के खंड शिक्षाधिकारी शिव शंकर मौर्य का कहना है कि विद्यालयों में कल से सघन चेकिंग अभियान चलाया जायेगा।
जो शिक्षक विलंब से पहुंचेगे, उनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जायेगी। मिड-डे-मील तथा दूध और फल वितरण की भी बारीकी से जांच करायी जायेगी। कुछ विद्यालयों में जलभराव के कारण दिक्कत है। उसे भी दूर कराया जायेगा।