फर्रुखाबाद। गंगा की बाढ़ भले ही खत्म हो चुकी है, लेकिन ग्रामीण बाढ़ के दर्द से तीन माह बाद भी कराह रहे हैं। जीवनभर की कमाई से बना घर आंखों के सामने ही गंगा में समा गया। इससे बाढ़ पीड़ितों की जिंदगी खुले मैदान के बीच पॉलिथीन के नीचे सिमट कर रह गई है। मुख्यमंत्री की मदद का मरहम बाढ़ पीड़ितों को अब तक न मिल पाने के उनका दर्द कम नहीं हो रहा है। अब उन्हें बच्चों को ठंड से बचाने की चिंता सता रही है। हालांकि प्रशासन ने हफ्तेभर में पट्टे आवंटित करने और पीड़ितों के बैंक खातों में धनराशि भेजने का दावा किया है।
गंगा की बाढ़ की विभीषिका ने इस कदर तांडव किया कि ग्रामीण उस बर्बादी का मंजर नहीं भुला पा रहे हैं। जिस घर में परिवार के साथ रहकर खुशहाल ग्रामीण खुद को सुरक्षित महसूस करते थे, वहीं समूचे घर धार में समा कर अस्तित्व खो चुके हैं। बेघर हुए ग्रामीण सड़क पर आ गए। कोई सड़क किनारे पॉलिथीन डालकर परिवार को पाल रहा है तो कोई मैदान में ही झोपड़ी, तिरपाल डालकर परिवार को समेटे बैठा है।
बाढ़ पीडि़तों का दर्द सुनने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी तीन सितंबर को पहुंचे। उन्होंने मदद का भरपूर भरोसा दिया। मंच से उन्होंने बेघर ग्रामीणों को आवासीय पट्टा के साथ आवास निर्माण के लिए एक लाख 20 हजार रुपये का प्रतीकात्मक चेक दिया। राहत सामग्री की किट भी वितरित की। इससे बाढ़ पीड़ितों को उम्मीद थी कि अब उन्हें फिर अपना आशियाना मिल जाएगा। फिलहाल मुख्यमंत्री की सभा के एक माह 19 दिन बीतने के बाद भी न ही पट्टे की भूमि मिली और न ही आवास की धनराशि। इससे ग्रामीण मायूस हैं। अब सर्दी भी दस्तक देने लगी है। दीपावली नजदीक है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों के लिए पॉलिथीन के नीचे सब दिन एक समान निकलते जा रहे हैं।
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बाढ़ से 373 आशियाने उजड़े
गंगा की बाढ़ में तहसील सदर, अमृतपुर व कायमगंज क्षेत्र के गांवों में 373 आशियाने तेज धार में समा गए। इसमें करीब 165 पक्के मकान भी शामिल हैं। सूत्राें के अनुसार प्रशासन स्तर से 186 बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए अनुमोदन दिया जा चुका है। जबकि 187 अभी लंबित हैं। इसमें तहसील सदर के सर्वाधिक 101, कायमगंज के 36 और तहसील अमृतपुर क्षेत्र के 12 बाढ़ पीड़ित शामिल हैं। जबकि जिला मुख्यालय स्तर 38 फाइलों का अनुमोदन लंबित बताया जा रहा है।
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सर्दी से बचने को आवास मिलने का इंतजार
तहसील सदर के बढ़पुर ब्लॉक क्षेत्र के गांव कटरी भीमपुर दौली की मड़ैया निवासी कीर्ति, दुर्गा, लज्जावती, रानी, रामकली, गिरजा देवी, श्याम देवी, दुर्गा, ज्ञान देवी, सीमा देवी, फूल देवी, दिलीप की मड़ैया निवासी कुसमा देवी आदि महिलाएं बुधवार को ही डीएम डॉ. अंकुर लाठर से मिली थीं। महिलाओं ने कहा कि उन लोगों को हर बार बजट न होने की बात कहकर टरका दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने जब तीन सितंबर को अपने हाथ से आवासीय पट्टा का स्वीकृत पत्र दिया और आवास निर्माण के लिए एक लाख 20 हजार की चेक सौंपा, तो अब तक अधिकारियों ने गरीबों तक उनका हक क्यों नहीं पहुंचाया। पट्टा की भूमि मिलना तो दूर की बात अभी चिह्नांकन भी नहीं कराया गया। दिलीप की मड़ैया निवासी कुसुमा देवी ने बताया कि हवा चलने पर पॉलिथीन उड़ जाने से वह लोग खुले आसमान के नीचे आ जाते हैं। 16 लोगों को मुख्यमंत्री ने आवास दिया है। आखिर अधिकारी आवास की धनराशि व पट्टा की भूमि कब देंगे।
जिम्मेदार बोले-हफ्ते भर में पट्टे आवंटित होंगे
163 बाढ़ पीडि़तों के आवास स्वीकृत, 53 को हो चुका भुगतान
राजस्व टीम भेजकर भूमि का चिह्नांकन शुरू करा दिया गया है। हफ्ते भर में बाढ़ पीड़ितों को आवासीय भूमि पर कब्जा दिलाया जाएगा। कुल 163 आवास स्वीकृत हुए हैं। इनमें 53 लाभार्थियों के खाते में धनराशि भेजी जा चुकी है। 61 फाइलें तैयार हैं। बजट मिलते ही धनराशि हस्तांतरित कर दी जाएगी। 49 लाभार्थियों के आवासों का अनुमोदन कर स्वीकृति दी जा चुकी है। शासन से बजट मांगा गया है। एक सप्ताह में बजट आने की उम्मीद है। बजट मिलते ही आवास के सभी लाभार्थियों के बैंक खाते में धनराशि भेज दी जाएगी।
- डॉ. अंकुर लाठर, जिलाधिकारी।
बयान
52 आवासीय पट्टा की भूमि पहले से चिह्नित है। पानी भर जाने से भूमि चिह्नांकन में कुछ देरी हुई। विधान परिषद चुनाव के बाद एक सप्ताह के अंदर भूमि का चिह्नांकन कराने के साथ लाभार्थियों को आवासीय पट्टा आवंटित कर दिए जाएंगे।
- विक्रम सिंह चाहर, तहसीलदार सदर