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चिल्लाते रहे नेता चलता रहा बुल्डोजर

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शहर के चौक पर ऐतिहासिक पटिया तोड़ती जेसीबी। - फोटो : FARRUKHABAD
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चिल्लाते रहे नेता, चलता रहा बुलडोजर
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फर्रुखाबाद। शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान दूसरे दिन भी चला। अतिक्रमण हटाने का विरोध कर रहे भाजपा नेता, व्यापारी चिल्लाते रहे लेकिन बुलडोजर अतिक्रमण हटाता आगे बढ़ता रहा। घुुमना से तिकोना चौकी तक नालों के ऊपर से अतिक्रमण हटा दिया गया।
दूसरे दिन अभियान की शुरुआत घुुमना से हुई। कुछ आगे बढ़ने पर भाजपा के मीडिया प्रभारी शिवांग रस्तोगी और उनके चाचा की दुकान पर लगे एंगल हटाए जाने लगे। इस पर भाजपा नेता बिफर गए। सिटी मजिस्ट्रेट से उनकी नोकझोंक हो गई। शिवांग ने चुटकी बजाकर सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार मौर्य को शासन से कार्रवाई कराने की धमकी दे डाली।
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अधिकारियों के सख्त होने पर भाजपा नेता चुप हो गए और बुल्डोजर अतिक्रमण ढहाता रहा। तिकोना के पास एक मंदिर के पत्थर और ग्रिल तोड़ने का मंटू मिश्रा ने विरोध किया, मगर तिकोना चौकी प्रभारी दीपक त्रिवेदी ने अतिक्रमण हटवा दिया। अभियान के दौरान व्यापारी नेता संजीव मिश्रा उर्फ बॉबी नजर नहीं आए। इसको लेकर दुकानदार भी खासे नाखुश दिखे। कुछ देर के लिए व्यापारी नेता अरुण प्रकाश तिवारी उर्फ ददुआ जरूर पहुंचे थे।
बुक स्टाल मालिक ने दिए डायरी-पेन
बुक स्टाल के सामने बुल्डोजर पहुंचने पर दुकानदार एक डायरी और पांच पेन लेकर पहुंच गया। अभिवादन करके सिटी मजिस्ट्रेट को डायरी वे पेन भेंट किया। पेन सिटी मजिस्ट्रेट ने रख लिया और डायरी गार्ड को दे दी। बुलडोजर आगे बढ़ गया।
अधिवक्ता के घर की पटिया तोड़ने पर विवाद
नुनहाई नुक्कड़ के पास एक अधिवक्ता ने सीओ सिटी राजवीर सिंह से कहकर अपने निवास की पटिया न तोड़ने को कहा। जैसे ही अधिवक्ता हटे, तो एक अधिकारी के इशारे पर बुलडोजर ने पटिया ढहा दी। इस पर अधिवक्ता व उनके घर की महिला सदस्य बिफर गईं और पास की सीढ़ियों को नहीं तोड़ने दिया। अधिवक्ता को सीओ सिटी ने कुछ देर समझाया।
वाहनों को रोका, तो जाम से जूझे लोग
अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान गलियों, सड़कों के वाहनों को रोका जाता रहा। यही वजह रही, कोतवाली रोड, रेलवे रोड, लोहाई रोड, पक्का पुल आदि स्थानों पर कई बार जाम लगा। यही नहीं गलियों से होकर वाहन निकलने से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
...और धराशाई हो गई चौक की ऐतिहासिक पटिया
शहर के त्रिपौलिया चौक पर पटिया, जहां से बड़े नेता अपने चुनावों का आगाज करते थे, उसे भी धराशाई कर दिया गया। अब नेताओं को ऊंचाई पर खड़े होने के लिए कोई और ही व्यवस्था करना होगी। यही नहीं कई पीढ़ियों से रफू का काम करने वाले परिवार का रोजगार भी खत्म हो गया। बड़े नेताओं में विमल प्रसाद तिवारी रहे हों अथवा ब्रह्मदत्त द्विवेदी, हर नेता के चुनाव का आगाज चौक के पूर्व और उत्तर के कोने पर बनी पटिया से ही होता था।
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वहीं से नेता भाषण देते थे और अन्य आंदोलनों का संबोधन भी यहीं से होता था। यही नहीं इसी पटिया पर एक परिवार की कई पीढ़ियां रफू का काम भी करती रही हैं। इस वक्त परिवार के सदस्यों ने पटिया पर बैठने के दिन बांट लिए थे। अतिक्रमण हटाओ अभियान में पटिया ढहने से नेताओं का मंच और रफूगर परिवार को रोजगार खत्म हो गया।
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