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साल के पहले दिन हादसे से मचा कोहराम

Fri, 01 Jan 2016 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद।
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फर्रुखाबाद। नए साल की पहली सुबह को ही चार जानें चली गईं। प्राइवेट बस और ट्रक की भिड़ंत में चार की मौत से इनके परिजनों में कोहराम मच गया। लोहिया अस्पताल में चारों ओर परिजनों की चीखें सुनाई पड़ रही थीं।
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शहर के मोहल्ला अंडियाना निवासी सतीश चंद्र सक्सेना नेशनल मोटर यूनियन की बस में ही चालक थे। वह सुबह  घर में  पूजा पाठ कर घर से निकले थे। इन्होंने पत्नी रामधनी उर्फ शीशवती से शाम को जल्द आने का वायदा किया था।  तब शायद सतीश को यह नहीं पता था कि वह परिजनाें से किया गया यह वायदा पूरा नहीं कर पाएंगे। सतीश की मौत की खबर घर  पहुंचने पर शीशवती और बच्चों का रो रोकर बुरा हाल हो गया।

  सतीश के दो बेटे सन्नी, दिलीप और बेटी प्रांशी उर्फ कीर्ति हैं। गंगानगर निवासी बैनामा लेखक विनोद दुबे रोज की तरह  छिबरामऊ तहसील जाने के लिए घर से निकले थे। इनकी  पत्नी ओबी दुबे ,  बेटे सूर्यकांत,  बेटी शालिनी व  शिल्पी के साथ नया साल मनाया था।
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 बस के हेल्पर नाजिर खां की पत्नी शबाना बेगम का बुरा हाल था। नाजिर के पांच बेटियां और तीन बेटे हैं। दीपचंद्र नेशनल मोटर  यूनियन में कर्मचारी थे। इनकी पत्नी ऊषा देवी मौत की सूचना पर अचेत हो र्गइं। क्षेत्र के समाजसेवियों ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की है।

बच्चों की शादी की सताने लगी चिंता
फर्रुखाबाद। सड़क हादसे में बस के हेल्पर नाजिर की पांच बेटी नीतू, चांदनी, बबली, पूनम, नेहा और मुस्कान हैं। तीन बेटे सामिर, कैश, आरजू हैं। इनमें से किसी की भी शादी नहंी हुई है। परिवार के लोगों का कहना था कि नाजिर की मौत के इनकी परवरिश और शादी पर संकट आ गया है।

दंपति शव यात्रा में शामिल होने जा रहे थे
फर्रुखाबाद। थाना जहानगंज के गांव महरूपुर खार निवासी कृष्णकांत के रिश्तेदार छिबरामऊ में रहते हैं। गुरुवार को उनकी मौत हो गई थी। शुक्रवार को कृष्णकांत, पत्नी सुनीता और चाची मनोरमा के साथ अंतिम यात्रा में शामिल होने जा रहे थे। इस दौरान हादसा हो गया। परिवार के लोगों का कहना था कि हादसा होने के दौरान उन लोगों की आंखाें के आगे अंधेरा छा गया था।

प्रधानाचार्य की हालत चिंताजनक
फर्रुखाबाद। जिला औरैया कस्बा बिधूना निवासी विश्रामलाल उत्तराखंड के जिला चमौली स्थित राजकीय इंटर कालेज में प्रधानाचार्य हैं। छुट्टियां होने के कारण विश्रामलाल फर्रुखाबाद रोडवेज बस से आए। इसके बाद यहां से वह प्राइवेट बस से जाने के लिए निकले थे। हादसे में घायल होने की जानकारी होेने पर पत्नी मालती देवी समेत परिवार के अन्य लोग आ गए। परिजन घायल को दूसरे अस्पताल रेफर करा ले गए। इनकी हालत चिंताजनक बनी हुई थी।

जब एंबुलेंस ईएमटी बना डॉक्टर
फर्रुखाबाद। बस और ट्रक की भिड़ंत की सूचना पर एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंची थी। यहां से दो शवों को एंबुलेंस आपातकालीन कक्ष में ले गई। जहां मौजूद डॉ. राजेश तिवारी ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। इन शवों को अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया गया। एक अन्य एंबुलेंस के कर्मचारी ने सतीश के शव को घटनास्थल से लाकर सीधे अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया। इसकी जानकारी अस्पताल के डॉक्टर को नहीं थी। जब अफसरों ने इसकी जानकारी अस्पताल में जाकर की तो यहां दो शवों के आने की बात कही गई। तब इसका खुलासा हुआ कि एंबुलेंस कर्मचारी ने शव को सीधे शवगृह में रखवा दिया था। इसके बाद सतीश के शव को वहां से लाकर आपातकालीन कक्ष में लाया गया। डॉक्टर के मृत घोषित करने के बाद फिर से शव को रखवाया गया।
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