विधि व्यवसाय करने के लिए वकीलों को अब बार कौंसिल उत्तर प्रदेश से
प्रैक्टिस सर्टीफिकेट पाना होगा। बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के आदेश पर
बार कौंसिल ने आदेश जारी कर दिया है। इसके लिए वकीलों को आवेदन करना होगा।
इसके बिना विधि प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। वकीलाें का स्थानीय बार संघ में
पंजीकरण होना भी जरूरी है।
वर्ष 2010 से पहले के रजिस्टर्ड वकीलों
को विधि व्यवसाय करने के लिए अब बार कौंसिल से सर्टीफिकेट आफ प्रैक्टिस
लेना होगा। इसके लिए पंजीयन का नवीनीकरण कराना होगा। आवेदन पर बार कौंसिल
की रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण कमेटी निर्णय लेगी। इसके बाद प्रैक्टिस को
सर्टीफिकेट जारी होगा। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार सिंह राठौर,
अधिवक्ता राजीव बापजेई ने बताया कि इसके लिए प्रत्येक वकील को 500 रुपये
शुल्क देना होगा। इस सर्टीफिकेट की
वैधता पांच साल होगी। नवीनीकरण न कराने
वाले प्रैक्टिस के पात्र नहीं होंगे। इनके नाम भी चुनाव सूची में शामिल
नहीं किए जाएंगे। अधिवक्ता राजीव बाजपेई ने बताया कि यह आदेश 26 नवंबर 2014
को जारी हुआ था। इस संबंध में बार कौंसिल ने पत्र भी जारी कर दिया है।
आदेश के छह माह के भीतर सर्टीफिकेट पाने के लिए आवेदन करना है।
जिला बार
एसोसिएशन के अध्यक्ष विपनेश सक्सेना ने बताया कि भारत का राजपत्र जारी हुआ
है। इसकी जानकारी नहीं है। अभी तक बार कौंसिल से कोई पत्र नहीं आया है। कुछ
वकीलों ने इस संबंध में जानकारी दी थी। जिला बार एसोसिएशन के महासचिव
संजीव पारिया ने बताया कि इस संबंध में कोई आदेश बार कौंसिल से नहीं आया
है। अगर आता तो इसको संज्ञान में लिया जाएगा और वकीलों को जानकारी दी
जाएगी।
प्रैक्टिस स्थान परिवर्तन की देनी होगी जानकारी
कोई
अधिवक्ता प्रैक्टिस के स्थान में परिवर्तन करता है, एक बार संघ को छोड़कर
दूसरे का सदस्य बनता है तो अधिवक्ता को इसकी जानकारी राज्य बार कौंसिल को
एक माह के अंदर देनी होगी।