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ठेंगे पर कानून, खतरे में नौनिहाल

Tue, 07 Feb 2017 11:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फर्रुखाबाद
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टेंपो की चालक की सीट पर बैठकर जाते निजी स्कूल के बच्चे। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शिक्षा विभाग के अफसरों और पुलिस प्रशासन की अनदेखी के कारण स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहाल वाहनों से खतरे के बीच सफर करने को मजबूर हैं। बीते माह एटा में हुए हादसे के बाद प्रशासन की नींद खुली थी, लेकिन एक-दो दिन बाद सिस्टम फिर पुराने ढर्रे पर आ गया। कार्रवाई न होने से स्कूल संचालक बेलगाम हैं। नियम कानूनों को ठेंगा दिखा रहे हैं।
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फर्रुखाबाद शहर, फतेहगढ़, कायमगंज, कमालगंज, नवाबगंज, मोहम्मदाबाद, राजेपुर क्षेत्र में 200 से अधिक प्राइवेट स्कूल हैं। यहां बसों के साथ मैजिक, टेंपो, ई-रिक्शा, खटारा जीपों, वैन आदि से बच्चों को लाया जाता है। स्कूल प्रबंधक अभिभावकों से फीस पूरी वसूलते हैं, लेकिन ज्यादा कमाई के चक्कर में क्षमता से ज्यादा बच्चों को वाहनों में बिठाते हैं। कम मानदेय देने के चक्कर में अकुशल ड्राइवर रखे हैं। सुरक्षा मानकों को तार-तार करके स्कूल वाले तो चांदी काट रहे हैं लेकिन बच्चों की जान पर आफत रोजाना मंडराती है।


शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो 90 फीसदी निजी कांवेंट स्कूल असरदार नेताओं, रिटायर अधिकारियों, ठेकेदारों के हैं, जिनकी अफसरों के बीच गहरी पैठ है। इस वजह से जानबूझकर जिला प्रशासन लचर रवैया अपनाए है। जब कभी शासन से कार्रवाई व अभियान चलाने के आदेश आते हैं तो कागजी कोरम पूरा कर अफसर इतिश्री कर लेते हैं। इसका खामियाजा स्टूडेंट भुगत रहे हैं।
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प्रत्येक स्कूली वाहन पर स्कूल का नाम, टेलीफोन नंबर लिखा होना चाहिए।

चालक के अलावा अनुभवी पुरुष या महिला सहायक तैनात हों जो बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखें।

बस के चालक व सहायक को लाइट ब्लू कलर की ड्रेस पहनना अनिवार्य है।

स्कूल बस का रंग गोल्डन यलो विथ ब्राउन, ब्लू लाइनिंग होना चाहिए।

12 सीट तक की बस में दो किग्रा, 12 से 20 सीट बस में 5 किग्रा का एक अग्निशमन यंत्र चालक की केबिन में होना चाहिए। 20 सीट से ऊपर की बस में 5 किग्रा का एक अग्निशमन यंत्र चालक की केबिन में व एक आपातकालीन गेट के पास रखा होना चाहिए।

हर वाहन में फर्स्ट एड बाक्स रखना अनिवार्य है।

सीबीएसई बोर्ड के विद्यालयों के वाहनों में जीपीएस लगा होना अनिवार्य है।
खिड़की के शीशे व चैनल इस प्रकार लगे हों कि बच्चे अपनी गर्दन या सिर खिड़की से बाहर न निकाल सकें। इमरजेंसी गेट हो। गेट के पास हाथ से पकड़कर चढ़ने के लिए हैंडल लगे हों।


जिलाधिकारी के आदेश पर 19 जनवरी को स्कूली बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे पर बैठक हुई थी। इसके बाद बीएसए के निर्देश पर सभी ब्लाकों व नगर क्षेत्र के स्कूल संचालकों को पत्र भेजा गया था। इसमें सामान्य शर्तें, सुरक्षा से संबंधित मानक, सीट्स की व्यवस्था की गाइडलाइन भी भेजी गई है। एआरटीओ, यातायात उप निरीक्षक व सभी एबीआरसी, एनपीआरसी को भी पत्र भेजकर नियमों का पालन कराने को कहा गया था। ये फरमान कागजी फाइलों में कैद होकर रह गए हैं।
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मंगलवार को दोपहर में विद्यालयों की छुट्टी होने के बाद फतेहगढ़ के मुख्य चौराहे पर ही टेंपो में बच्चे भूसे की तरह भरकर घर जाते दिखे। केंद्रीय विद्यालय समेत तीन स्कूलों के बच्चे मानक विहीन वाहनों में बैठे नजर आए।

उनकी सुरक्षा राम भरोसे दिखी। सहायक का अता-पता नहीं था। चालक अपने दोनों तरफ दो-दो बच्चों को बिठाकर ले जाते दिखे। चौराहे पर पिकेट ड्यूटी में पुलिस तैनात रहती है पर किसी ने रोका-टोका तक नहीं। केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य आरसी पांडेय का कहना है कि वे आटोवालों पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकते क्योंकि वे स्कूल से नहीं जुड़े हैं।

अभिभावकों को नोटिस भेजकर बच्चों को सुरक्षित स्कूल से घर ले जाने व स्कूल छोड़ने के लिए कहेंगे। पुलिस महकमे को भी नोटिस भेजकर ओवरलोड टेंपो पर कार्रवाई की मांग करेंगे।
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बोले जिम्मेदार
चुनाव बाद सख्ती से निपटेंगे
एआरटीओ ज्ञान मोहन सक्सेना का कहना है कि चुनाव में व्यस्त होने के कारण अभी अभियान नहीं चल पा रहा है। चुनाव बाद सख्ती से निपटेंगे।
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