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स्वास्थ्य प्रमाणपत्र को शिक्षकों की उमड़ी भीड़, धक्का-मुक्की

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लहिया अस्पताल की ओपीडी में पर्चा काउंटर पर लगी शिक्षक शिक्षिकाओं की भीड़। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद। दो दिन पहले प्राथमिक स्कूलों के लिए नियुक्ति पत्र दिए गए। अब ज्वाइनिंग को स्वास्थ्य प्रमाणपत्र की जरूरत है। इसे बनवाने के लिए लोहिया अस्पताल में सोमवार को शिक्षकों की भीड़ उमड़ी।
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कई बार हंगामा और धक्कामुक्की में बैरिकेडिंग टूट गई। व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस को बुलाना पड़ी। पूरे दिन अस्पताल में अव्यवस्थाएं हावी रहीं।
शनिवार को ब्रह्मदत्त द्विवेदी स्टेडियम में 738 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिए गए थे। स्कूलों में ज्वाइनिंग से पहले स्वास्थ्य प्रमाण पत्र बनवाने का फरमान मिला तो सभी शिक्षक परिजनों के साथ लोहिया अस्पताल सोमवार सुबह से ही पहुंच गए।
अचानक भीड़ से पर्चा काउंटरों पर धक्कामुक्की होने लगी। होमगार्ड और पीआरडी के जवानों से जब व्यवस्था न संभली तो आवास विकास चौकी प्रभारी विशेष कुमार पुलिस बल के साथ पहुंचे।
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उन्होंने लाइन में लगाकर पर्चे बनवाने के निर्देश दिए। पर्चा बनवाने के बाद शिक्षकों को आंख, फिजीशियन समेत अन्य डॉक्टरों से भी रिपोर्ट लगवानी पड़ी। इसके लिए भी लंबी लाइनें लगी रहीं।
इसके बाद प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पहली मंजिल पर स्थित सीएमएस के दफ्तर के बाहर गैलरी में भीड़ पहुंच गई। देर शाम तक प्रमाणपत्र के लिए मारामारी होती रही।
ओपीडी का पर्चा काउंटर हो अथवा सीएमएस का कार्यालय या फिर डॉक्टरों के चेंबरों में भी सोशल डिस्टेंसिंग नहीं दिखाई दी। लोग धक्कामुक्की करते नजर आए। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को हुई। भीड़ में सामान्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
औरैया की अंजली सिंह बोलीं, सुबह से परेशान हैं। कोई सुनने वाला नहीं है। भीड़ में पुरुष धक्कामुक्की करते हैं। बमुश्किल पर्चा बन सका हैै।
पश्चिमी रेलवे कालोनी की रिया यादव बोलीं, जब स्वास्थ्य प्रमाणपत्र बनवाना था, तो यहां व्यवस्थाएं करनी चाहिए थी। बड़ी दिक्कत हो रही है।
औरैया की सोनालिका ने बताया, महिलाओं का अलग काउंटर तक नहीं बनाया। मजबूरी में परिजनों को लाइन में लगाकर पर्चा बनवाना पड़ा।
मैनपुरी की सोनम अपने परिवार के साथ आईं। बोलीं, सुबह घर से चली थीं। दोपहर तक प्रमाणपत्र नहीं बन पाया। जैसे भी हो शाम तक बनवाकर ही जाना है।
मैनपुरी की अल्पना ने बताया, सब परेशान हैं। कोई बताने वाला नहीं कि कहां रिपोर्ट लगेगी। सबसे बड़ी दिक्कत सीएमएस दफ्तर में प्रमाण पत्र के लिए हो रही है।
प्रीतमनगला की ज्योति कहती हैं, काउंटरों पर खुले पैसे भी नहीं हैं। कुछ लोग कहते हैं हम बनवा देंगे। मगर खुद ही बनवाएंगे। जैसे भी हो।
नीचे भीड़ थी, तो कई बार राउंड लगाते रहे। इसके बाद ऊपर (सीएमएस दफ्तर) प्रमाणपत्र बनवाने की व्यवस्थाएं बनवाने पहुंचे। एक साथ भीड़ बढ़ने से कुछ दिक्कतें आईं। फिर भी टीमें लगाकर तेजी से काम करवा दिया। -डॉ.एसपी सिंह, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल

लोहिया अस्पताल स्वास्थ्य प्रमाणपत्र बनवाने को होती धक्का-मुक्की। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD

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