फर्रुखाबाद। हाईकोर्ट के बर्खास्तगी के आदेश के बावजूद छह साल तक नौकरी कर गलत तरीके से वेतन लेने वाले शिक्षक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होगी। प्रधानाचार्य ने शिक्षक के खिलाफ फतेहगढ़ कोतवाली में तहरीर दी है। विभाग से लिए गए वेतन की रिकवरी की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।
शहर के मोहल्ला मित्तूकूंचा निवासी सत्यप्रकाश पांडेय म्यूनिसिपल इंटर कॉलेज फतेहगढ़ से 31 मार्च को सेवानिवृत्त हुए हैं। इनकी पेंशन स्वीकृति के लिए डीआईओएस कार्यालय में विद्यालय से पत्रावली भेेजी गई थी। इसमें हाईकोर्ट के आदेश पर शिक्षक द्वारा वेतन लिए जाने का प्रधानाचार्य ने उल्लेख किया। पत्रावली देखने पर डीआईओएस ने कोर्ट के आदेश की कापी मांगी और अभिलेखों का परीक्षण शुरू कराया।
जांच में पता चला कि सत्यप्रकाश की नियुक्ति वर्ष 1991 में प्रबंधक ने की थी। वर्ष 1993 में शिक्षक की पत्रावली में कुछ फर्जीवाड़ा पकड़ में आया तो तत्कालीन प्रधानाचार्य सुरेश चंद्र मिश्रा ने शिक्षक को बर्खास्त कर दिया। बर्खास्तगी आदेश के खिलाफ शिक्षक ने हाईकोर्ट में रिट दायर की।
प्रधानाचार्य को बर्खास्त करने का अधिकार न होने का उल्लेख कर हाईकोर्ट ने स्टे दे दिया। वेतन न मिलने पर शिक्षक सत्यप्रकाश ने फिर हाईकोर्ट में रिट दायर की। इसमें विभागीय जांच होने तक वेतन देने का आदेश 2010 में हुआ, जिसके आधार पर शिक्षक को वेतन मिलना शुरू हो गया।
शिक्षक की रिटों पर हुए आदेशों के खिलाफ तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक ने 2011 में स्पेशल रिट दायर की। वर्ष 2016 में उच्च न्यायालय ने स्पेशल रिट में जिला विद्यालय निरीक्षक के पक्ष में फैसला दिया और सहायक अध्यापक को बर्खास्त करने का आदेश दिया। विभागीय खेल में बर्खास्तगी के आदेश को दबा दिया गया और शिक्षक नौकरी कर वेतन लेता रहा।
जांच में स्थिति स्पष्ट होने पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने कॉलेज प्रबंधक को शिक्षक के खिलाफ विधिक कार्रवाई के लिए पत्र लिखा। प्रबंधक के आदेश पर कॉलेज के प्रधानाचार्य गिरिजा शंकर ने सेवानिवृत्त शिक्षक सत्य प्रकाश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है।
प्रधानाचार्य से स्पष्टीकरण तलब
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. आदर्श कुमार त्रिपाठी ने म्यूनिसिपल इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य गिरिजा शंकर को नोटिस जारी किया है। इसमें कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद सेवानिवृत्त शिक्षक सत्य प्रकाश पांडेय के खिलाफ नीतिगत वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई। शिक्षक को वर्ष 2016 से वेतन भी दिया जाता रहा। इससे आपकी भी संलिप्तता होना प्रतीत होता है। डीआईओएस ने साक्ष्यों समेत स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।