फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकारी एंबुलेंस अफसरों पर लटकी कार्रवाई की तलवार

विज्ञापन
विज्ञापन
एंबुलेंस संचालकों पर लटकी कार्रवाई की तलवार
विज्ञापन

फर्रुखाबाद। नियमों को दरकिनार कर नर्सिंग होम पर मरीजों को उतारने के मामले में सरकारी एंबुलेंस संचालकों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। मामले में कंपनी के प्रदेश मुख्यालय ने जवाब मांगा है। जिसके बाद कंपनी के अफसर नर्सिंग होम के आसपास के भवन मालिकों से संपर्क करने पहुंचे। उनसे सीसीटीवी फुटेज हासिल करने की कोशिश की जा रही है। जब एंबुलेंस का नंबर मिल जाएगा, तभी पता चलेगा कि मरीज को नर्सिंग होम में उतारने वाली एंबुलेंस कौन सी थी।
अफसरों की ढिलाई से सरकारी एंबुलेंस कर्मी नर्सिंग होम पर मरीजों को उतार रहे हैं। अमर उजाला ने इस काले धंधे को पहले 13 नवंबर और फिर 21 नवंबर के अंक में उजागर किया। जिसके बाद प्रदेश स्तर से मामले का संज्ञान लिया गया है। कंपनी के डायरेक्टर ने स्थानीय जिला स्तरीय अफसरों से जवाब तलब किया है।
विज्ञापन

प्रदेश मुख्यालय से यहां तक कह दिया गया है कि यदि संबंधित एंबुलेंस को चिह्नित करके उसके कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तो अफसरों पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इस सख्ती के बाद एंबुलेंस संचालन करने वाली कंपनी के स्थानीय अफसरों में हड़कंप मच गया है।
शनिवार सुबह ही आवास विकास कालोनी स्थित नर्सिंग होम के आसपास भवनों और निजी अस्पतालों से संपर्क साधा गया। कोशिश रही कि सीसीटीवी फुटेज मिल जाएं, ताकि मरीज उतारने वाली एंबुलेंस को चिह्नित किया जा सके। काफी कोशिशों के बाद भी सीसीटीवी फुटेज नहीं मिल सके।
विज्ञापन

सीएमओ दफ्तर भी कम जिम्मेदार नहीं
सरकारी एंबुलेंस के संचालन के लिए जिला स्तर पर सीएमओ जिम्मेदार हैं। सीएमओ दफ्तर में एक डाक्टर नोडल अधिकारी हैं। यही नहीं एक लिपिक भी एंबुलेंस की मॉनीटरिंग करते है। बावजूद इसके जिला मुख्यालय पर ही सरकारी एंबुलेंस नर्सिंग होम पर मरीजों को उतारने में लगी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें