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Farrukhabad News: 1942 के आंदोलन में रुदायन स्टेशन पर स्वामीजी ने फोड़ा था बम

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कमालगंज। आठ अगस्त 1942 को अगस्त क्रांति घोषणा के बाद स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय फर्रुखाबाद के ज्यादातर नेता गिरफ्तार कर लिए गए थे। इससे नेतृत्व के बिना ही आंदोलन चला और पटरियों को उखाड़ने, बिजली के तार काटने, डाकखानों को जलाने व बम विस्फोट से अंग्रेजी व्यवस्था छिन्न-भिन्न करने का काम और तेज हुआ। अक्तूबर 1942 में कासगंज जनपद के सीमावर्ती रेलवे स्टेशन रुदायन में स्वामीजी ने बम ले जाकर फोड़ा था।
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अगस्त क्रांति से जनपद फर्रुखाबाद का गहरा नाता रहा। ''स्वराज्य ले लो या प्राण दे दो'' आंदोलन के समय योगेश चंद्र चटर्जी ने फर्रुखाबाद क्रांतिकारी पार्टी को पुनर्गठित कर रचनात्मक रूप दिया। कमालगंज के गांव सुल्तानपुर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विष्णुदयाल पालीवाल के नाती कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष सुधाकर पालीवाल बताते हैं कि उनके बाबा कहते थे कि योगेश चटर्जी ने भूमिगत रहकर अगस्त क्रांति को जिले में निर्णायक स्तर तक पहुंचाने में खास भूमिका निभाई, पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी थी। कायमगंज भी आंदोलन का केंद्र रहा।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय से आकर डॉ. हरिश्चंद्र चतुर्वेदी ने कायमगंज में आर्य समाज मंदिर को अपना केंद्र कार्यालय बनाया। बजरिया फर्रुखाबाद के लाला देवीसहाय, पितौरा के प्रेमचंद्र, अकबराबाद के रामचरण ने उन्हें सहयोग दिया। अकबराबाद व कायमगंज में बम बनाए जाते थे, जिनका वहीं से वितरण होता था।
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पौराणिक नगरी शृंगीरामपुर पुस्तक के लेखक विजयकांत कहते हैं कि जिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी इतिहास समिति फर्रुखाबाद की ओर से शुक्ला प्रकाशन मथुरा से प्रकाशित कराई गई। फर्रुखाबाद जनपद का इतिहास पुस्तक के पृष्ठ 137 पर रुदायन स्टेशन पर बम फोड़े जाने का उल्लेख है। आंदोलन के दौरान एक अधेड़ स्वामीजी आर्य समाज में डॉ. हरिश्चंद्र चतुर्वेदी के संपर्क में आए। अक्तूबर 1942 के अंतिम सप्ताह में स्वामी जी ने ही रुदायन स्टेशन पर बम ले जाकर फोड़ा था। स्वामीजी ने कभी अपना नाम नहीं बताया। स्वामी जी का बाद में कोई पता नहीं चल सका कि वह कहां गए। उस समय फर्रुखाबाद में क्रांति आंदोलन अपने चरम पर था। कोई भी अंग्रेज अधिकारी क्रांतिकारियों के डर से फर्रुखाबाद शहर या जिले के अन्य कस्बों में निकलने की हिम्मत नहीं कर पाता था।

1946 में कन्नौज से कालीचरण टंडन व कायमगंज से पूर्णिमा बनर्जी निर्विरोध चुने गए
- स्वाधीनता की बेला में 1945 तक फर्रुखाबाद के सभी राजबंदी जेलों से मुक्त हुए। 1946 में ब्रिटिश भारत में प्रांतीय धारा सभा (विधानमंडल) के चुनाव हुए। उस समय फर्रुखाबाद जिले में ही शामिल कन्नौज से कालीचरण टंडन व कायमगंज क्षेत्र से पूर्णिमा बनर्जी निर्विरोध निर्वाचित हुए। 15 अगस्त 1947 को शताब्दियों की दासता से मुक्ति मिली। (संवाद)
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