फर्रुखाबाद। पिछले 20 दिन में चीनी के दाम 15 रुपये किलो बढ़ गए हैं। जबकि चाय 50 रुपये किलो महंगी हुई। इससे अब सुबह की चाय की चुस्की रसोई का बजट बिगाड़ सकती है। अचानक चीनी के दाम बढ़ने से जमाखोरी की आशंका जताई जा रही।
महंगाई के दौरान में चीनी के भाव आसमान पर चढ़ते जा रहे हैं। जबकि सुबह नींद खुलने के बाद हर किसी को चाय की चुस्की लेने की आदत है। पिछले 20 दिन में तो चीनी के दाम हर रोज बढ़ रहे हैं। 45 रुपये किलो बिकने वाली चीनी 15 दिन पूर्व 48 रुपये किलो पहुंची दो-चार दिन में 50 का आंकड़ा छूने के बाद 55 रुपये किलो पहुंच गई। रविवार को फुटकर दुकानदारों को थोक में चीनी के भाव 57 रुपये किलो चुकाने पड़े। इससे पर अब लोगों को दुकानों से 60 रुपये प्रति किलो चीनी खरीदनी पड़ रही है। दुकानदारों का कहना है कि थोक विक्रेता चीनी की जमाखोरी कर रहे हैं। जिले में 40 से 50 ट्रक चीनी गोदामों में भरी है। इसके बावजूद दाम बढ़ रहे हैं। इसके अलावा हाल ही में चाय के दाम भी 40 से 50 रुपये किलो बढ़े हैं। इससे आम आदमी के लिए चाय की चुस्की अब जेब पर भारी पड़ेगी। इसके अलावा सरसों के तेल के दाम 10 रुपये लीटर व मैदा के दामों में 200 रुपये प्रति क्विंटल उछाल आया है। त्योहारी सीजन में मैदा, चीनी व तेल का खर्च हर घर में बढ़ जाता है। इससे लोगों की रसोई का बजट बिगड़ने लगा है।
जिम्मेदारों ने पल्ला झाड़ा
प्रभारी जिला पूर्ति अधिकारी एआरओ अनिल कुमार ने बताया कि भाव पर अंकुश लगाने या जमा खोरी रोकने के संबंध में शासन से कोई आदेश नहीं आया। वैसे भी जमाखोरी पर नियंत्रण का काम खाद्य एवं विपणन विभाग का है। वहीं डिप्टी आरएमओ रोली सिंह ने बताया कि जमाखोरी व भाव में उछाल से उन्हें कोई-लेना नहीं है और न ही शासन से कोई आदेश प्राप्त हुआ है।