लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में कैदी को स्टेचर पर ले जाते पुलिस कर्मी। संवाद
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फर्रुखाबाद। लोहिया अस्पताल में यदि आप मरीज लेकर गए हैं, तो खुद ही स्ट्रेचर बाहर तक लाना और मरीज अंदर ले जाने की जिम्मेदारी उठानी होगी। इससे पुलिस विभाग भी अछूता नहीं रहता।
लोहिया अस्पताल में कर्मचारियों की बेहद कमी है। जो ड्यूटी पर हैं, वे कभी व्यस्त होते, तो कभी लापरवाह हो जाते हैं। यही कारण है कि लोग अपने मरीजों को खुद अंदर तक पहुंचाने को मजबूर होते हैं। दोपहर करीब 12 बजे सेंट्रल जेल से कैदी शंकर (57) पुत्र श्रीपाल सिंह को लेकर दो बंदी रक्षक लोहिया अस्पताल पहुंचे। कैदी हालत गंभीर थी। इसलिए बंदी रक्षक दौड़कर स्ट्रेचर लेने गए, मगर अंदर कोई कर्मचारी नहीं दिखा। वह खुद ही स्ट्रेचर बाहर लाए और बीमार कैदी को एंबुलेंस से उतारकर उस पर लिटाकर खींचते हुए इमरजेंसी तक ले गए।
जब बंदी रक्षक कैदी को उठाकर लिटा रहे थे, तो उसका एक हाथ उल्टा दब गया। इससे कैदी की चीख निकल गई। हालांकि बंदी रक्षकों ने तुरंत ही उसे उठाकर सही कर लिया। ऐसे में यदि प्रशिक्षित कर्मी होता, तो यह दिक्कत नहीं आती। प्रभारी सीएमएस डा. एसपी सिंह ने बताया कि कर्मचारञी काफी कम हैं। वैसे ड्यूटी लगाई जाती है। हो सकता है वह किसी अन्य काम में व्यस्त हो। फिर भी वह मामले को दिखवाएंगे।