खेत में जंगली जानवर के पांव के निशान देखते डीएफओ व अन्य।
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क्षेत्र में दहशत का पर्याय बने जंगली जानवर को पकड़ने के लिए रविवार को वन विभाग की टीम ने डेरा डाल दिया है। खेतों में जानवर के पंजे के निशान मिलने के बाद टीम ने कांबिंग शुरू कर दी हैं। डीएफओ का दावा है कि निशान लकड़बग्घे के है।
रविवार को जंगली जानवर के बछड़े के मारने की सूचना पर डीएफओ अपनी टीम के साथ पहुंचे। डीएफओ देवेश श्रीवास्तव के साथ कानपुर से रैपिड फोर्स टीम के साथ डॉ आरके सिंह और प्रतापगढ़ के वन रेंजर यतेंद्र भान मौके पर पहुंचे। टीम ने कांबिंग की तो कुछ दूरी पर जानवर के पंजों के निशान मिलें।
डीएफओ ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि खेत में मिले पंजे के निशान लकड़बग्घे से मिलते हुए हैं। लकड़बग्घे के निशान छोटे और नुकीले होते हैं। पंजा जमीन पर रखते ही प्वाइंट का निशान बन जाता है। बाघ के पंजों में नुकीलापन नहीं होता है। श्रीवास्तव ने कहा कि बछड़ा तीन दिन पहले मरा था, उसमें कीड़े पड़े हुए थे। जिसे लकड़बग्घे ने खाया होगा। बाघ मरा हुआ जानवर नहीं खाता है।