एसएसए कार्यालय में कबाड़ में पड़े प्रश्नपत्र।
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16 लाख रुपये के बजट से परिषदीय विद्यालयों की परीक्षाएं संपन्न कराने की योजना धरी की धरी रह गई है। हालात यह है कि परीक्षा के लिए प्रश्नपत्रों को बीएसए कार्यालय में दीमक चाट रही है।
युवाओं की नींव कही जाने वाली बेसिक शिक्षा के हाल बेहाल हैं। जिले के 1855 परिषदीय विद्यालयों में अर्द्धवार्षिक परीक्षा को सुचारु रूप से कराने के लिए शासन से 16 लाख रुपये का बजट मिला था। लेकिन समय से किताबें, पेपर न मिल पाने के कारण योजना धरी की धरी रह गई ह
विभाग द्वारा शहर की एक फर्म को पेपर छापने का ठेका दिया गया था और उसे 14 अक्तूबर को मुख्यालय पर पेपर पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए थे। समय से पेपर न मिल पाने के कारण बीएसए संदीप चौधरी को 18 तारीख की परीक्षा को स्थगित करके 25 अक्तूबर को करना पड़ा था। सोमवार को भी सर्व शिक्षा अभियान के कार्यालय में पेपर स्कीमें धूल फांकती पड़ी देखी गईं।
प्राथमिक विद्यालय में प्रति बच्चा पेपर के लिए ढाई रुपये और उत्तर पुस्तिकाओं के लिए साढ़े सात रुपये और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में प्रति बच्चे पेपर के लिए पांच और उत्तर पुस्तिका के लिए 15 रुपये का बजट शासन से प्राप्त हुआ है। परीक्षा प्रभारी गंगेश शुक्ल ने बताया कि कुछ पेपर अतिरिक्त छपवाए गए थे। इसलिए यह पेपर रखे हुए हैं।