जिन हाथों में राखी बांध रक्षा का वचन लिया, वहीं काल बन गए। चाचा के आदेश पर भाइयों ने सविता को मौत के घाट उतार दिया।
सविता की हत्या ने एक बार फिर रिश्तों को तार तार कर दिया। जन्म देने वाली मां, पिता समान प्यार करने वाले चाचा, सदा रक्षा का वादा करने वाले भाई उसके प्रेम के खिलाफ हो गए। योजना बनाकर सविता की निमर्म हत्या कर दी।
सविता की हत्या की जानकारी मां सुदामा देवी को विधिवत थी। बेटी का शव मिलने के बाद मां सुदामा देवी तथा उसके तीनों भाइयों और चाचा के चेहरे पर सदमे के निशान नजर नहीं आए। सविता के शव मिलने पर भाई शिवम बोला था कि सड़ांध के कारण उसे परेशानी हो रही है। रोने से तबियत खराब हो सकी है, जिस वजह से उसने अपने सभी परिजनों से रोने से मना कर दिया है।
घटनास्थल पर ही लोगों ने चर्चा की कि सविता का चाचा राजाराम पुत्र खुशहाली जाहिल किस्म का आदमी है। सविता के घर से निकलते ही उसने सविता को जान से मार देने का आदेश अपने भतीजों को दे दिया था। जिन हाथों में सविता ने अपनी अस्मत व जान की रक्षा के लिए रक्षाबंधन पर राखी बांधी थी।
1 सितंबर को उन्हीं हाथों ने अपनी बहन का गला घोंट दिया। इन हालातों में भाइयों का दिल न पसीजने के पीछे चाचा का जाहिलपन छिपा हुआ है। सविता की बहन का मौसेरा देवर कुंवारा है और एक ही जाति का है। सविता की शादी की चर्चा भी उससे चल रही थी। सविता अनिल के साथ हर हाल में ब्याह रचाना चाहती थी।
इस वजह से दिल्ली में नौकरी कर रहे उसके भाई को बुलाया गया और पूरे परिवार ने एकराय होकर सविता की भावनाओं पर पानी फेर दिया। इस निर्णय के बाद सविता ने घर छोड़कर चले जाने का फैसला ले लिया। अपनी स्वेच्छा से शादी करने के फैसले के कारण ही सविता को अपनी जान गवानी पड़ी।