प्रवासियों को भोजन कराते अमृतपुर एसओ। संवाद बरेली के भी ध्यानार्थ ---- साहब! भूख लगी है और चला भी नह?
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अमृतपुर (फर्रुखाबाद)। साहब! भूख लगी है और चला भी नहीं जा रहा... यह दर्द भरी दास्तां एसओ सुरेंद्र सिंह को जिला बदायूं के थाना उसवां के रहने वाले तीन मजदूरों ने सुनाई।
राजीव कुमार व अनुज तथा उसके पिता बृजेंद्र छह माह पहले तेलंगाना में काम करने गए थे। लौटते समय महोबा, कानपुर होते हुए जिले की सीमा तक पहुंच गए। फिर पैदल चलते हुए शुक्रवार दोपहर तीनों थाने के अंदर पहुंचे। बताया कि लॉकडाउन में कई दिन वह एक टाइम का खाना खाकर ही जीने को मजबूर थे। कई रातों को पानी पीकर ही काम चलाया।
इस पर एसओ ने सरकारी मैस पर तीनों के लिए खाना बनवाकर इनको खिलवाया। खाना खिलवाने के बाद एसओ ने रुपये की समस्या के बारे में पूछा तो तीनों बोले कुछ नहीं चाहिए गांव की माटी और अपनों का प्यार में सूखी रोटी खाकर ही गुजारा कर लेंगे पर कहीं बाहर नौकरी करने के लिए नहीं जाएंगे। इन सभी एसओ ने ट्रक पर बैठाकर बदायूं भिजवा दिया।
इससे पहले उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के बाद सरकार के प्रयास से पहले महोबा पहुंचे और कानपुर के लिए बस से भिजवा दिया गया। कानपुर में बस खराब होने पर पैदल व ट्रक से सफर पर निकल पड़े।