फर्रुखाबाद। शासन से बजट न मिलने से नगरीय पीएचसी व ग्रामीण क्षेत्र के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में दवाओं का संकट है। बर्न क्रीम, ड्रेसिंग सामग्री, आई ड्राॅप, फंगस लोशन, बच्चों की खांसी के सिरप न होने से सीएचसी से उधार लेकर काम चलाना पड़ रहा है। सीएमओ ने भी सीएचसी प्रभारियों को अपने अस्पताल से दवाएं उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर खोले जा रहे हैं। 150 आरोग्य मंदिरों पर सीएचओ की तैनाती है। सभी आरोग्य मंदिरों को प्रतिवर्ष दवाओं के लिए बजट दिया जाता है। यहां 84 प्रकार की दवाएं अनुमन्य हैं। इस वित्तीय वर्ष में शासन से आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के लिए दवाओं का बजट चार माह बाद भी नहीं मिला है। इससे अब दवाओं का संकट आ गया है।
पिछले दिनों सीएमओ ने टीमें गठित कर ग्रामीण क्षेत्र के आरोग्य मंदिरों का निरीक्षण कराया तो हकीकत खुलकर सामने आ गई। राजेपुर क्षेत्र के कई आरोग्य मंदिरों पर एक्सपायरी दवाएं रखी मिलीं। नवाबगंज क्षेत्र में कहीं दवाओं का टोटा मिला तो कहीं ताले जड़े मिले। करीब 40 तरह की दवाएं नहीं मिलीं। पुराना स्टॉक खत्म होने से अब पूरी स्वास्थ्य सेवा उधार की दवाई पर ही टिकी है। इसके बाद सीएमओ ने 28 जुलाई को सभी सीएचसी प्रभारियों को आदेश जारी किया। कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के लिए डीवीडीएमएस पोर्टल पर शासन से बजट आवंटित नहीं किया गया है। जब तक शासन से बजट आवंटित नहीं होता है, तब तक सीएचओ के मांगपत्र के अनुसार सीएचसी से दवाएं उपलब्ध कराई जाएं। नगरीय पीएचसी को भी सिविल अस्पताल लिंजीगंज से दवाएं उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि बजट न आने तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।